रूद्राक्ष का महत्व और धारण करने की विधि ! Rudraksha

रूद्राक्ष

शिवपुराण, लिङ्गपुराण एवं स्कन्द आदि पुराणों में रूद्राक्ष के महत्व एवं माहात्म्य का विशेष रूप से वर्णन किया गया है। रूद्राक्ष को साक्षात् शिवस्वरूप कहा गया है। रूद्राक्ष भगवान् शिव को अति प्रिय है। रूद्राक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा उस पर जप करने से समस्त …

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कालसर्प योग के प्रकार और शान्ति के उपाय – Kaalsarp Yog

kaalsarp yog

एक कहावत प्रचलित है कि जिस प्रकार मन्दिर में भोग एवं अस्पताल में रोग का बहुत बड़ा महत्व होता है, उसी प्रकार ज्योतिष में कालसर्प का अपना एक अलग ही महत्व होता है। ज्योतिष में इन्हीं योगों में से एक है कालसर्प योग(Kaalsarp Yog)) । …

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हनुमान साधना सामग्री एंव मंत्र :- Hanuman Sadhna Mantra

Hanuman Sadhna

हनुमान साधना(Hanuman Sadhna) करने के लिए साधक को बहुत सावधानी पूर्वक ध्यान रखना पड़ेगा, हनुमान जी कलयुग के जागृत देवता हे और ब्रह्मचारी हे इसलिए साधक को साधना के दरमियान ब्रह्मचर्यं का पालन करना जरुरी हे, साधनाकाल में मांस मदिरा का सेवन करना वर्जित हे,हनुमान …

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भगवान विष्णु का महासुदर्शन मंत्र – Vishnu Maha sudarshana mantra

Vishnu Mantra

यह विष्णु मंत्र(Vishnu Mantra/Maha sudarshana mantra) नारायणीयम पुस्तक के 8 वें अध्याय का अंतिम श्लोक है, जो श्रीकृष्ण भगवान के बारे में है। इस प्रार्थना को 48 दिनों तक 108 बार जपने से व्यक्ति किसी भी लाइलाज बीमारी से ठीक हो जाता है। इस मंत्र …

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सनातन धर्म क्या है ? और उसके पूजा नियम – Sanatan Dharma

sanatan dharma

सनातन का अर्थ है जो सदा के लिए सत्य हो जिसे कभी झुठलाया नहीं जा सकता। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो जैसे ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही …

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जैन धर्मानुसार विभिन्न चमत्कारी जैन मंत्र – Jain Mantra

jain mantra

जैन धर्मानुसार यह नवकार मन्त्र सब पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में महान् मंगल है। इसके पढ़ने से आनन्द-मंगल होता है क्योंकि इसके पढ़ते ही लोक के असंख्य महान् आत्माओं का स्मरण व आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस मंत्र के अलावा …

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ॐ नमो नारायणाय अष्टाक्षर मंत्र जप सँख्या एंव महात्म्य ! Ashtakshar mantra

Ashtakshar mantra

आज हम आपको सभी मन्त्रों में उत्तम अष्टाक्षर नारायण मंत्र बतलाऊँगा, जिसका जप करने वाला मनुष्य जन्म और मृत्युसे युक्त संसाररूपी बन्धनसे मुक्त हो जाता है। एकान्त स्थान में श्री विष्णु मूर्ति के सम्मुख अथवा जलाशय के निकट मन में भगवान् विष्णुका ध्यान करते हुए …

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भगवान महादेव द्वारा नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए की गयी स्तुति ! Narasimha

narasimha

भगवान महादेव द्वारा नृसिंह सहस्त्र पाठ स्वयं महादेव जी द्वारा Narasimha को प्रसन्न करने के लिए स्तुति की गयी | भगवान की मूर्ति या चित्र के सामने सुबह शाम पाठ को ऊँचे स्वर मेंपढ़ें। एक नृसिंह सहस्त्र पाठ से सुद्धि दस पाठ से सिद्धि प्राप्त होती …

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ब्रह्मसूत्र जनेऊ धारण करने के नियम ! Janeu Mantra

janeu

Yagyopavit/Janeu ब्रह्मचर्य, गार्हस्थ, वानप्रस्थ तीनों आश्रमों के लिए अनिवार्य है। ब्राह्मण के लिए १२ वर्ष, क्षत्रिय के लिए १६ वर्ष, वैश्य के लिए २० वर्ष के मध्य ही यज्ञोपवीत धारण कर लेना चाहिए। यज्ञोपवीत मात्र धागा नहीं है। इसे ब्रह्म सूत्र कहा जाता है। इस …

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गण्डमूल नक्षत्र किसे कहते है? और उनके नाम – Gandmool Nakshatra

Gandmool Nakshatra

दो नक्षत्र अथवा दो राशिओं का संधि काल कुफल दायक होता है।जहाँ दो राशियों एव दो नक्षत्रों का संधिकाल एक ही स्थान पर हो तो वह अत्याधिक कुफल देने वाला होता है। राशि चक्र में ऐसे तीन स्थान है जहाँ दो राशियों एवं दो नक्षत्रों …

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