Acidity: आहार द्वारा एसिडिटी का तुरंत घरेलु इलाज

सामान्य स्वास्थ्य की स्थिति में, रक्त मूल रूप से क्षारीय (आल्कलाइन) होता है, जो हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है। शरीर में जीवन आवश्यक दहन–प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाले पदार्थों के लक्षण अधिकतर एसिडिक होने के कारण रक्त में आल्कली का प्रभाव होता है। जब शरीर में प्रवाही की अम्लता असामान्य रूप से बढ़ जाती है, तब अम्लपित्त की बीमारी होती है। एसिड की यह विस्तृत मात्रा रक्त द्वारा शरीर के भिन्न भिन्न अंगों, प्रमुख रूप से फेफड़ो तक पहुँचाई जाती है, जहाँ से वह बाहर निकल जाती है। इस लेख में हम एसिडिटी क्या होती है, एसिडिटी के लक्षण, एसिडिटी के घरेलु इलाज़(Acidity) के बारे जानेंगे।

एसिडिटी के लक्षण(Acidity)

एसिडिटी या अम्लपित्त के लक्षणों में प्रमुख हैं – भूख, अपचन, गले में जलन, मितली या उबकाई आना, उलटी होना, सिरदर्द होना तथा सुस्त लगना और अन्य कई तरह की स्नायुतंत्र की बीमारियाँ। इन्हीं लक्षणों से लगभग सभी रोग पनपना शुरू हो जाते हैं। गुर्दों में शोध या ‘ब्राइट्स रोग‘, संधिवात, अकाल वृद्धावस्था, आर्टिरियो–सोरायसिस, उच्च रक्तचाप, त्वचा के रोग और अन्य कई हानिकारक रोगों की उत्पत्ति भी इन्हीं लक्षणों से होती है। इससे शरीर की शक्ति कम होती है, जिसके परिणामस्वरूप रोगों का ख़तरा बढ़ जाता है।

एसिडिटी होने के कारण(Acidity)

अम्लपित्त या एसिडिटी होने का प्रमुख कारण है गलत आहार, जिसमें एसिड पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ बहुत ज्यादा मौज़ूद होते हैं। चयापचय की सामान्य क्रिया के दौरान शरीर में कई एसिड बनते हैं और इनके अलावा, खाद्यपदार्थों द्वारा भी कई एसिड शरीर में दाख़िल होते हैं। जब भी शरीर में एसिड की मात्रा में अच्छी–ख़ासी वृद्धि होती है और जब ये एसिड फेफड़ों, गुर्दों और आंतों द्वारा ठीक से बाहर नहीं निकलते जिसके फलस्वरूप एसिडिटी(Acidity) होता है। अम्लीफ्त के कई कारण हैं – अतिसार (डायरिया), पेचिश (डिसेन्ट्री), हेजा (कॉलेरा) की वजह से आल्कली की मात्रा कम होना, रुधिराभिसण और फेफड़ों की बीमारियों में साँस के अवरोध के कारण कार्बनडायोक्साइड का जमा होना तथा भूखे रहने से या उलटियाँ होने पर या मधुप्रमेह (डायाबीटीज) के परिणामस्वरूप अेसेटोन पदार्थों का जमा होना।

 आहार द्वारा एसिडिटी का घरेलु इलाज

अम्लपित्त या एसिडिटी की रोकथाम के लिये आहार में एसिड अर्थात् क्षारीय खाद्यपदार्थों का योग्य अनुपात बनाये रखना चाहिए। फल और सभी हरी और जड़मूल वाली सब्जियाँ बहुत ही आल्कलाइन खाद्य पदार्थ हैं, जो रक्त तथा ऊतकों के अन्य प्रवाहियों को आल्कलाइन बनाने में मदद करते हैं। इस प्रकार हमारे प्रतिदिन के आहार में 40 प्रतिशत आल्कलाइन खाद्यपदार्थ; जैसे कि ताज़े फल, कंदमूल, दाल, पत्तेदार तथा जड़मूलवाली सब्जियाँ और 20 प्रतिशत हिस्सा एसिड बनाने वाले खाद्यपदार्थ होने चाहिए। ऐसे योग्य आहार से रक्त में आवश्यक आल्कलीनीटी सुनिश्चित हो जायेगी, जो शरीर को एकदम स्वस्थ रखेगी। अम्लपित्त के मरीज़ के आहार में क्षार पैदा करने वाले खाद्यपदार्थ जितने ज्यादा होंगे, यह बीमारी उतनी ही जल्दी ठीक होगी।

रक्त को आल्कलाइन बनाने के लिये सब से उपयुक्त और आसान तरीका नींबू, संतरा आदि खट्टे फल और इन फलों के रस का सेवन है। इन फलों में मौज़ूद आल्कलाइन क्षार, विशेष रूप से पोटाश की वजह से इनमें आल्कलीनीटी बढ़ाने की क्षमता होती है। लगभग आधा लिटर संतरे के रस में 0.85 ग्राम, आधा लिटर नींबू के रस में 0.55 ग्राम और आधा लिटर अंगूर के रस में 0.5 ग्राम पोटेशियम रहता है। अम्लपित्त को रोकने के लिये पालक का उपयोग भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस पत्तेदार सब्जी में केल्शियम तथा अन्य आल्कलाइन तत्त्वों की भरपूर मात्रा होती है, जो रक्त की आल्कलीनीटी के स्तर को बनाये रखने में तथा ऊतकों को स्वच्छ बनाये रखने में सहायक होती है। अम्लपित्त के लिये टमाटर का उपयोग भी एक और असरकारक उपचार है।

Acidity में उपचार की रुपरेखा

1.​तीन दिनों तक सिर्फ़ संतरे का रस पीकर उपवास करें। इस दौरान, सुबह आठ बजे से लेकर रात में आठ बजे तक हर दो घंटे बाद संतरे के रस में पानी मिलाकर पीते रहें। हल्के गर्म पानी से एनिमा का प्रयोग कर आँतें साफ करें।
2.​तीन से पाँच दिनों तक सिर्फ़ फलों का सेवन करें। इस दौरान, दिन में तीन बार भोजन के रूप में सिर्फ़ ताज़े रसदार फल : जैसे सेब, नाशपत्ती, आड़ू (पीच), पपीता, अंगूर, संतरे और अनन्नास का सेवन करें
3.​इसके पश्चात्, क्रमिक रूप से योग्य संतुलित आहार अपनायें
4 प्रात:काल उठने पर : एक ग्लास हल्के कुनकुने पानी में आधे नींबू का ताज़ा रस और एक टी–स्पून शहद मिलाकर पीयें।
5 .सुबह का नाश्ता : सेब, अंगूर, नाशपत्ती, आड़ू, पपीता जेसे ताज़े फल और साथ में शहद मिलाया हुआ एक ग्लास दूध। ​दोपहर का भोजन : एक बड़ा कटोरा लेटिस, गाज़र, ककड़ी, टमाटर, मूली, बीट जैसी ताज़ी, हरी सब्जियाँ और अंकुरित एल्फ़ैल्फ़ा और मूँग के दानों में नींबू का रस मिलाकर खायें। साथ में अम्लीय और कम अम्लीय फल भी ले सकते हैं। ​शाम का नाश्ता : एक ग्लास खट्टे फल का रस। रात का भोजन : एक कटोरा भर बीट, गाज़र, फूलगोभी, बैंगन और कुम्हड़ा जैसी सब्जियों को भाप से या हल्का पकाकर ताज़ा ही खायें। अम्लपित्त में मरीज़ को फल जैसे आल्कलाइन पदार्थ प्रचुर मात्रा में लेने चाहिए ।

Acidity होने पर क्या न खायें

चाय, कॉफी, चीनी (सफ़ेद शक्कर) तथा मेदा और चीनी तथा मेदे से बने सभी खाद्यपदार्थ, सभी परिष्कृत (रिफ़ाइन्ड) खाद्यपदार्थ, तले हुए खाद्यपदार्थ, मसाले और अचार।

इस लेख में आपको एसिडिटी या अम्लपित्त से सम्बंधित दी हुई जानकारी केसी लगी कृपया कमेंट करके जरूर बताये और हेल्थ से सम्बंधित लेख पड़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करे।

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