एलर्जी के लक्षण और घरेलु इलाज : Allergy In Hindi

एलर्जी उस समय होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी भी एलर्जीन पर प्रतिक्रिया करती है। ऐलर्जी ‘Allergy’ शब्द का अर्थ है – किसी बाहरी एन्टीजन के संपर्क में आने के कारण ऊतकों की बदली हुई या असामान्य प्रतिक्रिया। यह लोगों में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार हो सकता है। जब किसी बाहरी प्रोटीन,एलर्जीन और शरीर के ऊतकों के बीच संपर्क होता है। एलर्जी की गंभीरता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हल्के से लेकर जानलेवा तक हो सकती है। लेकिन इसके लक्षणों को दबाने के लिए कुछ उपचार उपलब्ध हैं। इस लेख में, हम एलर्जी के लक्षण और घरेलु इलाज, Allergy In Hindi के बारे में चर्चा करेंगे।

एलर्जी क्या है? – Allergy In Hindi

ये एलर्जीक प्रतिक्रियाएँ मरीज़ के प्रतिजन के संपर्क में आने के बाद तुरंत या कई घंटों बाद अथवा कभी कभी कई दिनों बाद होती हैं। शरीर के लगभग सभी अंग एलर्जी से प्रभावित हो सकते हैं। शरीर का वह हिस्सा जो प्रभावित होता है, उसे ‘शोक ओर्गन’ कहते हैं। एलर्जी होने की सामान्य जगहें हैं – नाक, आँखें, त्वचा, छाती, आँतें और कान। एलर्जीक प्रतिक्रियाएँ कई प्रकार की चीजों और परिस्थितियों से हो सकती हैं; जैसे कि परागकणों, धूल, सौंदर्यप्रसाधन, प्राणियों के केश, ज़हरीले पौधे, सीरम, टीका–द्रव्य (वेक्सीन) और औषधियाँ; प्राकृतिक कारक जैसे गर्मी, ठंड और सूर्यप्रकाश; कई प्रकार के खाद्यपदार्थ। आज की व्यस्त जीवनशैली में एलर्जी बहुत सामान्य है।

हाल ही के रिसर्च अध्ययन से भारत में 100 में से 20% से 30% तक लोग प्रभावित होने के कारण एलर्जी संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। भारत में बहुत ही सामान्य एलर्जी विकारों में अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, एक्जिमा, एनाफिलेक्सिस, दवा, भोजन, कीट एलर्जी और पित्ती शामिल हैं।

एलर्जी के लक्षण- Allergy Ke Lakshan

ऐलर्जी/Allergy पैदा करने वाली चीजों की विविधता के समान एलर्जी के लक्षण भी विविध होते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं – बार बार सिरदर्द होना, आधासीसी, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, हताशा, तंत्रिकाशूल, छींके आना, कन्ज़क्टिवाइटिस, खुज़ली, हृदय–दाह, परागज़ ज्वर, अपचन, कब्ज़, डायेरिया, गेस्ट्रिक अल्सर, अस्थमा, मोटापा, उच्च रक्तचाप, छाती में दर्द, दिल के दौरे, नाक भर जाना या उसमें से पानी आना, साँसो की गति मंद पड़ना, चेहरे और आँखों में सूजन आना आदि। एक ही खाद्यपदार्थ अलग अलग व्यक्तियों में अलग अलग लक्षण पैदा कर सकता है। कई एलर्जी बहुरूपी होती हैं, जो बहुरूपी प्रतिजनों द्वारा पैदा होती हैं।

एलर्जी के कारण – Allergy Symptoms In Hindi

एलर्जी आहार में गलतियों एवं दोषपूर्ण जीवनशैली के कारण शरीर के अंदर प्रतिरोधक शक्ति में कमी के कारण होती है। एलर्जी का प्रमुख कारण बच्चों को 10 से 12 महीनों की उम्र से पहले ही सिरिअल्स, मांस, मकई, मलाईवाला दूध आदि का दिया जाना है। ये सभी खाद्यपदार्थ एलर्जीक प्रतिक्रियाएँ पैदा करते हैं क्योंकि बच्चों में उस उम्र से पहले इन खाद्यपदार्थों को पचाने के लिये ज़रूरी पाचक रसों का अभाव होता है। बच्चों को कम से कम आठ महीने की उम्र तक माँ का दूध पिलाना चाहिए क्योंकि इस उम्र में सभी आवश्यक पोषक तत्त्वों को उपलब्ध कराने का प्रकृति का यही तरीका है। ऐलर्जी का और एक प्रमुख कारण आजकल के प्रोसेस्ड खाद्यपदार्थ हैं। आहार के असंतुलन से भी ऐलर्जी की स्थिति पैदा हो सकती है। रिफाइन्ड शक्कर (सफ़ेद शक्कर) और उसके परिणामस्वरूप होनेवाली रक्तशर्करा की अनियमितताओं की वजह से अथवा आहार की गलत आदतों के कारण ख़निज़ पदार्थों और विटामिन के असंतुलन के कारण शरीर की शर्करा को संतुलित रखने की क्षमता में अवरोध पैदा होता है। भावात्मक और मानसिक तनाव भी ऐलर्जी पैदा कर सकते हैं। तनाव के बारे में विश्व के प्रमुख संशोधनकर्ता डॉ. हेन्स साल्ये के अनुसार एलर्जी के लक्षण अक्सर शरीर द्वारा प्रतिकार से अधिक और कुछ नहीं है।

एलर्जी का घरेलु उपचार – Allergy ka gharelu upay

घरेलु उपचार से विभिन्न एलर्जीक विकारों को ठीक करने के बहुत तरीके हैं। जहाँ तक हो सके नैसर्गिक, कुदरती, बिना प्रोसेस किये हुए खाद्यपदार्थ ही खाये। जितना संभव हो सके विकार पैदा करनेवाली चीज़ें को दूर करे। जिन खाद्यपदार्थों से एलर्जी/Allergy होने का संदेह हो उन्हें दो सप्ताह तक छोड़ दें। उदाहरण के लिये कई लोगों को चोकलेट से तकलीफ़ होती है, वे ‘केरोब’ आज़मा कर देख लें, जिसका स्वाद चोकलेट की तरह ही होता है। एलर्जी के कारण का पता लगाने का एक तरीका है; डॉ. कोका का ‘पल्स टेस्ट’। इस पद्वति में आप भोजन से पहले अपनी नाड़ी की धड़कन नाप लें। फिर एक ही खाद्यपदार्थ को खायें और आधे घंटे बाद फिर से नाड़ी की धडकन जाँच लें। अगर आपको 84 से ज्यादा धड़कनें न हों, तो आप ऐलर्जी से मुक्त हैं। पर यदि आप की धड़कनें उससे ज्यादा बढ़ जाती हैं और खाने के एक घंटे बाद भी ज्यादा ही रहती हैं, तो आप को उस खाद्य पदार्थ से एलर्जी का पता चल जायेगा।

1.​तीन से पाँच दिनों के लिये फलों का ताज़ा रस।
2.​फलों के रस के बाद, एक सप्ताह तक गाज़र, अंगूर या सेब जैसे फल अथवा सब्जी का आहार लें।
3.​इसके पश्चात्, एकल आहार में एक और खाद्यपदार्थ शामिल करें। एक सप्ताह बाद, तीसरा खाद्यपदार्थ और इसी प्रकार खाद्यपदार्थ बढ़ाते जायें।
4.​चार सप्ताह बाद, प्रोटीनयुक्त खाद्यपदार्थों को लेना शुरू करें, पर एक साथ एक ही खाद्यपदार्थ शामिल करें। ​नये शामिल किये गये खाद्यपदार्थ से ऐलर्जी की प्रतिक्रिया होने पर उसे लेना तुरंत ही बंद कर दें और एक नया खाद्यपदार्थ लें।
5.​आल्कलीनीटी पैदा करनेवाले खाद्यपदार्थों जैसे ताज़े फल, फलों का रस और कच्ची सब्जियों का प्रचुर मात्रा में सेवन करें। निषिद्ध चीज़ें : चाय, कॉफी, शराब, तम्बाकू, चोकलेट, कोला पेय, चीनी, मिठाइयाँ एवं अन्य मीठी चीज़ें, रिफाइन्ड और प्रोसेस्ड खाद्यपदार्थ, मांस से बने खाद्यपदार्थ एवं अचार।
6.​नियमित व्यायाम और योग के आसन करें।

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