अपेंडिक्स में क्या नहीं खाना चाहिए एंव घरेलु उपाय – appendix in hindi

अपेंडिक्स आँतों की सभी गंभीर बीमारियों में एक बहुत सामान्य बीमारी है। इस बीमारी में कृमिरूप आंत्रपृच्छ में शोथ या सूजन होती है। स्त्री–पुरुष दोनों को होनेवाली यह बीमारी उग्र और दीर्घकालीन दोनों स्वरूपों में हो सकती है। 10 से लेकर 30 वर्ष की आयु के लोगों में तीव्र पेट दर्द की आपातकालीन स्थितियों में से 50 प्रतिशत अवसरों पर यही बीमारी कारणभूत होती है। यह बीमारी अविकसित देशों के मुक़ाबले विकसित देशों में ज्यादा पाई जाती है। इस लेख में हम अपेंडिक्स क्या होता है?(appendix in hindi), अपेंडिक्स के कारण(appendix ke lakshan),अपेंडिक्स के घरेलु उपाय के बारे में बात करेंगे।

अपेन्डिक्स क्या होती है? – appendix in hindi

अपेन्डिक्स एक छोटी नली है, जो बड़ी आँत के पहले हिस्से उण्डुक के अंतिम छोर पर स्थित होती है। सामान्य तौर पर यह तीन से चार इंच लंबी होती है। उसकी संरचना में वही सख़्त रेशेदार बाहरी आवरण होता है, जो संपूर्ण अन्ननली की सुरक्षा करता है। इस बाहरी आवरण के नीचे स्नायुगत ऊतक की परत होती है और उसके बाद लिमफोइड़ ऊतक की परत होती है। अपेन्डिक्स का कार्य यही लिमफोइड़ ऊतक करता है और यह शरीर में पैदा हुए विकारी कचरे को अथवा त्वचा या झिल्लियों द्वारा दाख़िल हुए जैविक विष को निष्क्रिय करता है।

अपेन्डिक्स के लक्षण- appendix ke lakshan

अपेन्डिक्स की बीमारी उदर के मध्य में अचानक दर्द से शुरू होती है। बाद में यह दर्द धीरे धीरे दाहिनी ओर नीचे तक चला जाता है। दर्द से पहले पेट में सामान्य बेचैनी, अपचन, डायरिया अथवा कब्ज़ हो सकते हैं। मरीज़ को आम तौर पर 100º से 102º फेरनहाइट तक हल्का बुख़ार भी हो सकता है। उबकाइयाँ आना मरीज़ को एक–दो बार उलटी होना इसके लक्षण है। उदर की दाहिनी ओर के ऊतक सख़्त और तंग हो जाते हैं। मरीज़ को दाहिना पैर सीधा करने पर कुछ राहत मिल जाती है। उदर की बायीं ओर दबाने पर दाहिनी ओर दर्द बढ़ता है। खाँसी और छींक से दर्द की तकलीफ़ और भी बढ़ जाती है। यदि शोथ या सूजन बढ़ती ही जाय तो अपेन्डिक्स फट जाता है और इससे गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे पेरिटेनाइटिस कहते हैं। इस स्थिति में तात्कालिक शल्यक्रिया करनी पड़ती है। अपेन्डिक्स के पुराने मरीज़ को उदर की दाहिनी ओर निचले हिस्से में बार बार दर्द होता है। साथ ही कब्ज़, भूख की कमी और हल्की मितली भी आ सकती है।

अपेंडिक्स के कारण – causes of appendix in hindi

अपेन्डिसाइटिस आँतों की विषाकत स्थिति के कारण होता है। सीकम में जब ज़हरीला मल पदार्थ बहुत अधिक जमा हो जाता है, तब अपेन्डिक्स उत्तेजित हो जाता है और अधिक सक्रिय होकर सूज जाता है। विषैले पदार्थों को नष्ट करने का यह स्थानीय तरीका कुदरत की ओर से एक प्रयास है । यह बीमारी आहार की गलत आदतों और तंत्र की कमज़ोरी के कारण होती है। मृदुरेचक औषधियों को आदतन लेने के कारण आँतों का अंदरूनी आवरण सूज जाता है और यही बात अपेन्डिसाइटिस के बढ़ने का एक कारण है। फिर आँतों के क्षेत्र में सामान्यत: मौज़ूद कुछ जीवाणुओं के कारण अधिक शोथ और संक्रमण होता है।

अपेंडिक्स का घरेलु उपाय – Appendix Gharelu Upay

अपेंडिक्स के मरीज को तीव्र दर्द, उलटियाँ और बुख़ार के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तुरंत बिस्तर पर लिटा देना चाहिए। इस बीमारी के इलाज में विश्राम का बहुत महत्त्व है। मरीज़ को उपवास का सहारा लेना चाहिए क्योंकि अपेंडिक्स के लिये यही एकमात्र सही उपचार है। आहार बिलकुल भी नहीं लेना चाहिए। आँतों के निचले हिस्से को साफ़ करने के लिये पहले तीन दिनों तक हर रोज़ आधे लिटर हल्के गर्म पानी से एनिमा लेना चाहिए। दिन में कई बार दर्द के स्थान को गर्म कपड़े से दबाना चाहिए। अपेंडिक्स मरीज़ को फलों का रस देना चाहिए। यह सरल उपचार समझदारी पूर्वक करने से अपेंडिक्स के दौरे को रोका जा सकता है। तीन दिनों तक फलों का रस लेने के बाद उसे तीन मूलभूत खाद्यपदार्थों बीज, सूखे मेवे और अनाज़ तथा साग सब्जियाँ और फलों पर आधारित संतुलित आहार अपनाना चाहिए। अपेंडिक्स की दीर्घकालीन या पुरानी बीमारी में अल्पकालिक उपवास के बाद, दो या तीन सप्ताह तक सिर्फ़ दूध का आहार देना चाहिए।

अपेंडिक्स के उपचार में कुछ सब्जियों का रस, विशेष रूप से गाज़र के साथ बीट और ककड़ी का रस मिलाकर बनाये गये रस को महत्त्वपूर्ण माना गया है। अपेंडिक्स के दर्द में उदर पर मसाज़ भी फायदेमंद होता है। एक बार सीकम का मल पदार्थ बड़ी आँत में चला जाय और फिर बाहर निकल जाय तो अपेन्डिक्स का शोथ और जलन कम हो जायेंगे और अपेन्डिक्स को शल्यक्रिया द्वारा निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अपेन्डिक्स के उपचार की रुपरेखा – appendix in hindi
1.​दो या तीन दिनों के लिये सिर्फ़ फलाहार, दिन में तीन बार, पाँच घंटों के अंतराल पर ताज़े रसदार फलों का सेवन करें।
2.​अगले तीन दिनों तक फल और दूध का आहार लें। इस पथ्यापथ्य के दौरान, प्रत्येक फलाहार के साथ दूध को शामिल करें।
3.प्रात:काल उठने पर : आधे नींबू का ताज़ा रस और एक टीस्पून शहद मिलाकर एक ग्लास हल्का गुनगुना पानी।
4.​सुबह का नाश्ता : फल और दूध; बाद में यदि चाहें, तो सूखे मेवे लें।
5.​दोपहर का भोजन : जो भी उपलब्ध हो, वे सब्जियाँ, भाप से पकाकर, दो से तीन गेहूँ की रोटियाँ और एक ग्लास छाछ।
6.​शाम का नाश्ता : एक ग्लास ताज़ा फल या सब्जी का रस अथवा गन्ने का रस।
7.​रात का भोजन : एक कटोरा ताज़ी हरी सब्जियों का सलाद, नींबू का रस निचाड़ कर लें। साथ में अंकुरित बीज़ और ताज़ा, घर का बना पनीर या एक ग्लास छाछ।

निषिद्ध चीज़ें : माँस से बने खाद्यपदार्थ, तले हुए खाद्य पदार्थ, मसाले, गर्म मसाले, चीनी, मेदा तथा चीनी और मेदे से बने खाद्यपदार्थ, चाय, कॉफ़ी और रिफाइन्ड सिरिअल्स तथा डिब्बेबंद खाद्यपदार्थ।

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