Thiamine: बेरी-बेरी विटामिन बी 1 थियामिन के स्वास्थ्य लाभ और सावधानियाँ

विटामिन बी1 जिसे थियामिन(Thiamine) के नाम से भी जाना जाता है। यह बी समूह के सबसे महत्त्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। इसे एन्यूरिन (aneurin) के नाम से भी पुकारा जाता है। विटामिन बी1 पानी में घुलनशील है। विटामिन बी1 की खोज ऐज्कमेन नामक एक डच चिकित्सक ने 1897 में तब की थी जब वह जावा में एक सैनिक अस्पताल में कार्य कर रहा था। उसने देखा कि बाढ़े में पाली जा रही मुर्गियों में वही लक्षण थे जो बेरीबेरी से पीड़ित उसके रोगियों में थे।

विटामिन बी1 थियामिन – Thiamine

थियामिन पोषण में मदद करता है, हृदय की पेशियों की सुरक्षा करता है तथा मस्तिष्क के कार्य को उत्तेजित करता है। यह पूरे स्नायु तंत्र के कार्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। यह पाचन में सहायक होता है। यह विटामिन क्रमाकुंचन (peristalsis) या आंतिल गति को बेहतर बनाता है तथा कब्ज़ से बचाता है। यह सामान्य लाल रक्तकोशिकाओं की संख्या को बनाए रखने में मदद देता है, संचार को बेहतर बनाता है तथा स्वस्थ त्वचा बनाये रखने में मदद करता है। यह सीसा जहर (lead poisoning) के हानिकारक प्रभाव से सुरक्षा देता है तथा हृदय रोगों से संबंधित द्रव्य एकत्रीकरण (oedema or fluid retention) को रोकता है। यह थकान को कम करता है, शक्ति को बढ़ाता है तथा समय से पहले आने वाले बुढ़ापे को रोकता है। यह बुद्धि को तीव्र बनाता है। यदि इसे अन्य विटामिनों के साथ लिया जाये तो यह अधिक क्षमता से कार्य करता है।

विटामिन बी 1 थियामिन के स्त्रोत – Thiamine

थियामिन के सर्वश्रेष्ठ स्रोत चौकर युक्त अनाज विशेषकर गेहूं, चावल तथा जौ होते हैं। थियामिन बाहरी परतों या छिलकों में पाया जाता है। लेकिन जब भंडारित अनाज को परिष्कृत करते हैं, उदाहरण के लिये, सफेद आटा या पॉलिश किए गए चावल तो थियामिन की मात्रा कम हो जाती है। फलियां जैसे सोयाबीन तथा काला चना थियामिन के अच्छे स्रोत हैं। इस विटामिन के अन्य अच्छे स्रोत हैं सब्ज़ियां जैसे कमलककड़ी, शिमला मिर्च, शलजम के पत्ते, चुकंदर के पत्ते; फल जैसे खुर्मानी या एप्रीकोट तथा अनानास या पाइन-एप्पल; सूखे मेवे जैसे मूंगफली, पिस्ता तथा सरसों के बीज और पशुओं से प्राप्त होने वाले भोजन जैसे पोर्क या सुअर का गोश्त, भेड़ का यकृत या लिवर तथा मांस।

थियामिन की कमी के लक्षण – Thiamine

भोजन में थियामिन की कमी से भूख कम लगना, अपाचन, दीर्घकालिक कब्ज़, वज़न में कमी, मानसिक अवसाद, थकान तथा अनिद्रा की शिकायत हो सकती है। इससे पेशीय कमज़ोरी, पैरों में पेशीय संकुचन, हृदय की धीमी धड़कन, क्रोध, पेट में रोगकारक हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन तथा इसके कारण पाचन में विकार हो सकते हैं। शरीर में थियामिन की कमी से, हृदय की पेशियां आलसी तथा थकान-ग्रस्त हो जाती हैं और दिल के ऊपरी कक्ष अपनी शक्ति खो देते हैं जिसके कारण वह धीरे-धीरे बड़े हो जाते हैं। जिसे हृदय की अतिवृद्धि कहा जाता है। दीर्घकालिक कमी से बेरीबेरी, तंत्रिका शोथ तथा इडीमा या द्रव की अधिकता के कारण होने वाली सूजन आदि बीमारियां हो जाती हैं। विटामिन बी1 की कमी मस्तक के चर्म में संचार को धीमा करती है जिससे बाल गिरते हैं तथा नए बाल बहुत धीमे आते हैं। थियामिन की कमी का कारण शराब का अधिक सेवन, भोजन में चीनी की अधिक मात्रा तथा अधिक प्रोसेस्ड या परिष्कृत भोजन होते हैं।

विटामिन बी 1 थियामिन के लाभ – Vitamin B1

विटामिन बी 1 थियामिन प्रतिदिन कब्ज़ तथा अन्य पाचक व्याधियों, तंत्रिका शोथ एवं अन्य स्नायु तंत्र के रोगों के इलाज में कारगर होता है और यह मानसिक अवसाद में भी लाभदायक है। थियामिन का प्रयोग शराब छुड़ाने, अनिद्रा तथा तनाव कम करने में भी लाभदायक है।

मानसिक अवसाद या घबराहट : कार्बोहाइड्रेट के पाचन में विटामिन बी1 अत्यावश्यक है। स्नायु तंत्र की कोशिकाएं ऊर्जा के लिये कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर होती हैं। विटामिन बी1(Vitamin B1) का मूल कार्य स्नायु कोशिकाओं को ऊर्जा देना तथा क्षति से बचाना होता है। इस विटामिन का प्रयोग उन मानसिक व्याधियों में किया जाता है जिसमें पेशीय कमज़ोरी तथा ऐंठन हो। यह विशेषरूप से न्यूराइटिस अथवा तंत्रिका शोथ तथा पोलीन्यूराइटिस (polyneuritis), र्‌हीयूमेटिक न्यूरेल्जिआस (rheumatic neuralgias), शियाटिका (sciatica) और र्‌हीयूमेटिक दर्द (rheumatic pain) में उपयोगी है।

हृदय रोग : विटामिन बी1 की कमी से हृदय रोग और अधिक जटिल हो सकता है। विटामिन बी1 को विशेषरूप से बेरीबेरी संबंधित हृदय रोग में लाभदायक पाया गया है जिसका मुख्य कारण कुपोषण होता है तथा जो आमतौर से शराबियों में पाया जाता है। इस प्रकार के मामलों में पूरी तरह आराम, उच्च कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन-युक्त भोजन तथा 200 मि. ग्रा. या 2,00,000 मा. ग्रा. की खुराक को दिन में तीन बार इंजेक्शन द्वारा लेने से लाभ होता है। कुछ लाभ मिलने के बाद भी वही भोजन लेना चाहिए तथा 50 मि.ग्रा. या 50,000 मा. ग्रा. की खुराक को दिन में तीन बार खाना चाहिए।

पेट तथा आंत के रोग : पेट तथा आंत सम्बन्धी रोगों में विटामिन बी1 की 50,000 मा. ग्रा. की खुराक दिन में तीन बार भोजन के तुरंत बाद किसी उपयुक्त पाचक इंज़ाइम के साथ लेनी चाहिए। यह विशेषरूप से कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन अपाचन से भूख की कमी, गैस बनना, कब्ज़ तथा उदरीय फुलावट में लाभदायक पाया गया है।

Vitamin B1 Thiamine सावधानियां :

थियामिन की अधिकता मूत्र द्वारा शरीर से निकल जाती है तथा यह शरीर की किसी भी कोशिका या अंग में एकत्र नहीं होता। लेकिन इसकी अत्यधिक खुराक के लक्षणों में कंपन, त्वचा पर दाद (herpes), इडीमा, नर्वसनेस, तीव्र हृदयगति तथा एलर्जी सम्मिलित हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में, इस विटामिन की अत्यधिक आपूर्ति से थायरायड तथा इंसुलिन के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

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