पेचिश/प्रवाहिका रोग होने के कारण एंव घरेलु उपाय – dysentery home remedies

पेचिश आम तौर पर आँतों में होने वाला संक्रमण है, जिसमें शुरुआत में बलगम या आंव जैसा मल आता है । बाद में कभी-कभी खूनी दस्त भी होने लगते हैं । आयुर्वेद में इसे प्रवाहिका रोग कहा गया है । पेट में मरोड़ जैसा दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, बुखार, पानी की कमी- जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं । रोगी को अग्निमांद्य, उदर शूल के साथ अतिसार होता है । व्यक्ति मल त्याग करके आता है, फिर थोड़ी देर में उसे पेट में मरोड़ और ऐठन होने लगती है । और वह फिर से शौच के लिए भागता है । बार-बार मरोड़ के साथ दस्त आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है । इस लेख में पेचिश के कारण,लक्षण एंव घरेलु उपचार(dysentery in hindi) के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।

पेचिश या आंव के कारण? – dysentery in hindi

इस रोग के होने का मुख्य कारण गंदगी है । शौचालय से आकर साबुन से हाथ न धोना, संक्रमित भोजन या पानी का सेवन करना, इसके कारण हो सकते हैं । इसके संक्रमण का मुख्य कारण बैक्टीरिया या अमीबा परजीवी होता है । पेचिश दो प्रकार से हो सकती है- 1. संक्रमित बैक्टीरियल पेचिश – शिगेला, सैल्मोनेला, कैम्पाइलोबैक्टर, एंटीहिमोरेजिक ई कोलाई आदि जीवाणुओं का संक्रमण पेचिश का कारण बनता है । आमतौर पर होने वाली पेचिश शिगेला के कारण शिगेलोसिस होती है । 2. अमीबी पेचिश- यह एकल कोशिकाधारी परजीवी अमीबा के कारण होती है । इसे अमीबीयासिस कहते हैं । जीर्ण अवस्था में क्रॉनिक अमीबायसिस गंभीर रूप धारण कर लेती है । यह मुख्यतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिकतर देखने को मिलती है । इसकी वजह स्वच्छता का न होना है । अक्सर यह देखने को मिलता है कि इसका संक्रमण एक साथ कई लोगों में होता है, तथा यह तेजी से मोहल्ले, कस्बों में फैलता है । इसकी वजह, दूषित भोजन करना तथा दूषित मल के संक्रमण का फैलना होता है । दूषित भोजन- फूड प्वाइजनिंग, बासी खाना, सड़े-गले फल, सब्जी आदि का सेवन दूषित पानी या अन्य पेय पदार्थों से खुले में शौच करने से इसके फैलने की संभावना हो जाती है ।

पेचिश के लक्षण – symptoms of dysentery in hindi

पेचिश के साथ कब्ज होना, दस्त के साथ ऐठन, गैस बनना, मतली, पेट में नाभि के आसपास दर्द होना, इस रोग के लक्षण है । रुक-रुक कर बुखार का आना, पतला मल आना, बच्चों में प्यास, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, सुस्त होना आदि भी देखने को मिलता है । बार-बार मल त्याग से गुदा में जलन तथा पेट में गुड़गुड़ाहट मिलती है । शरीर में पानी की अधिक कमी होने पर प्यास, मुंह सूखना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, चक्कर, लो बीपी होना, जैसी शिकायतें मिलती हैं । आंतों का संक्रमण कई बार फैलकर फेफड़े या दिमाग में भी संक्रमण उत्पन्न कर सकता है ।

पेचिश का घरेलू उपचार – dysentery home remedies

  • तीन नींबू के छिलके 250ml पानी में उबालकर उसको निचोड़ कर सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें ।
  • अर्जुन की छाल का काढ़ा 15 से 30 ml ले सकते हैं ।
  • अनार के 60 ग्राम छिलकों को लेकर 250 ml दूध में उबालकर जब एक तिहाई रह जाए तो इसको छान कर पिए ।
  • ईसबगोल 10 ग्राम, दही 100 ग्राम, एरंड तेल 50ml मिलाकर दिन में तीन से चार बार ले।
  • बेल का गूदा, गुड़ में मिला कर ले । पुरानी आंव होने पर बेल का गूदा, सूखी अदरक और छाछ मिलाकर ले ।
  • 2 ग्राम भांग की पत्ती, काली मिर्च और चीनी मिलाकर ले ।
  • अनार का रस, आधा कप और पपीते का रस, चार चम्मच मिलाकर ले ।
  • केले के बीच कच्ची खांड या गाय का मक्खन लगाकर सेवन करें ।
  • सूखा पुदीना 10 ग्राम, अजवाइन 10 ग्राम, एक चुटकी सेंधा नमक और दो बड़ी इलायची के दाने, मट्ठे के साथ या पानी से लें ।
  • काली मिर्च 4 से 5 चूसे और पानी पी ले । जामुन का रस 2 चम्मच, मिश्री और गुलाब जल दो चम्मच मिलाकर लें ।
  • सुबह-सुबह आम की गुठली पीसकर दही या मट्ठे के साथ सेवन करें ।

पेचिश का आयुर्वेदिक उपचार – dysentery ayurvedic remedies

गंगाधर चूर्ण, कुटजघन वटी, बिल्व चूर्ण, आमदोशंतक चूर्ण, आमदोशंतक टेबलेट इसमें(dysentery in hindi) लाभकारी हैं । परहेज क्या करें – बासी खाना, देर से बचने वाला गरिष्ठ भोजन, चना, मटर, बेसन, मैदा, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, भिंडी, करेला, टिंडे आदि का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें । भोजन हमेशा उबालकर, फल हमेशा छीलकर खाएं । कच्चे फल, हरे सलाद बिना अच्छे से धोए ना खाएं । होटल में क्रीम, दूध, डेयरी पदार्थ का कच्चे रूप में सेवन ना करें । नल का पानी पीने से बचें । पानी सदैव उबालकर, ठंडा करके, छानकर पिएँ ।

पेचिश का निदान कैसे संभव ? – dysentery in hindi

चिकित्सक रोगी के इतिहास से अनुमान लगाते हैं कि क्या संक्रमण दूषित भोजन, जल आदि के कारण हुआ है । रोगी ने हाल-फिलहाल में कोई यात्रा की हो या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो । आंतों की गति का बढ़ना, बुखार आना, बीपी, पल्स आदि लक्षणों की जांच की जाती है । रक्त एवं मल की जांच करवा सकते हैं । निर्जलीकरण के लक्षणों की गंभीरता चिकित्सक ही भली-भांति समझ सकते हैं । अत: डॉक्टर के पास तुरंत उपचार हेतु जाना चाहिये ।

क्या है इलाज पेचिश/प्रवाहिका रोग का ?

दस्त लगना एक शारीरिक प्रतिरोधक प्रक्रिया है । हमारा शरीर चाहता है कि आँतों में जो भी गड़बड़ हो रही है, वह सब ठीक हो जाए । इसके लिए की आँतों की गति सामान्य से अधिक बढ़ जाती है तथा सभी दूषित पदार्थों को शरीर बाहर निकालने का प्रयास करने लगता है । इसीलिए आयुर्वेद के अनुसार आंतों की गति को कम करने वाली या रोकने वाली औषधि का वर्जित किया गया है । हालांकि इस प्रक्रिया में अधिक द्रव् पदार्थ निकलने से निर्जलीकरण यानि डिहाइड्रेशन हो जाता है । इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए । चिकित्सक, पानी की कमी को दूर करने के लिए नसों में सैलाइन आदि द्रवआधन का प्रयोग करते है । एंटीबायोटिक, मेट्रोनिडाजोल आदि के द्वारा संक्रमण को रोकने की प्रयास किया जाता है । बचाव कैसे हो सकता है ? खाना पकाने या खाने के बाद हाथ धोना, शौच के बाद हाथ धोना जैसी अच्छी आदतों से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। शौचालय के दरवाजे को छूने के उपरांत भीं तुरंत हाथ धोना चाहिए । भोजन से पहले हाथ धोना चाहिए । यात्रा में साफ भोजन और साफ पानी का प्रयोग करना चाहिए । मुंह धोने, कुल्ला करने, दांत साफ करने इत्यादि में भी साफ पानी का प्रयोग करना चाहिए ।

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