औषधीय पोषक तत्व का भंडार है सहजन – Drumstick in hindi

सहजन एक बहुत ही सामान्य वनस्पति है इसे मोरिंगा(Moringa oleifera) भी कहते है, जो संपूर्ण भारत और पाकिस्तान में उपजाई जाती है जो अपनी कोमल फलियों के कारण बहुत लोकप्रिय है। यह कीटाणुनाशक एवं पाचन-तंत्र की सफाई करने वाला होता है। सहजन का पेड़ कई मेहराबी शाखाओं वाला, बारहमासी, सीधा, छरहरा, मध्यम ऊँचाई वाला होता है। दक्षिण भारत के अधिकतर घरों के पिछवाड़े में इसे उगाया जाता है। सहजन(sahjan moringa) के फल छोटे तथा फूल सफेद और छोटी गोल पत्तियाँ वाले होते हैं जिन्हे पकाकर वनस्पति के रूप में खाया जाता हैं।

इस लेख में सहजन क्या है(drumstick in hindi),सहजन के फायदे के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

सहजन के फायदे – drumstick benefits in hindi

सहजन में काफी औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसकी पत्तियाँ अपने विभिन्न चिकित्सीय गुणों के कारण विशेष रूप से उपयोगी हैं। सहजन लौह तत्त्व से भरपूर होने का कारण आहार के रूप में इसका उपयोग किया जाता हैं। किन किन रोगो में सहजन(drumstick in hindi) का उपयोग किया जाता है।

  1. बच्चों के लिए टॉनिक : शिशुओं और बढ़ते बच्चों के लिए इसकी पत्तियाँ टॉनिक का कार्य करती हैं। अच्छे परिणामों के लिए पत्तियों का रस निकालकर तथा छानकर दूध के साथ मिलाकर देना चाहिए। यह मिश्रण स्वस्थ और मजबूत हड्डियों तथा खून के बहाव को स्वच्छ रखने के लिए उत्कृष्ट टॉनिक का कार्य करता है।
  2. गर्भावस्था और स्तनपान : गर्भवती महिलाओं द्वारा नियमित रूप से इस मिश्रण के सेवन से उन्हें आवश्यक कैल्सियम, लौह और विटामिन की आपूर्ति होती रहती है। यह बच्चेदानी की शिथिलता दूर करने, प्रसव को सरल करने तथा प्रसूति के पश्चात् की जटिलताओं को कम करने में फायदेमंद है। इसकी पत्तियों से बनी सब्जी बच्चे के जन्म के बाद खाने से यह माँ के दूध को बढ़ाता है।
  3. श्वसन संबंधी बाधाएँ : सहजन की पत्तियों से बना सूप श्वास की बीमारियों, जैसे—दमा, ब्रोंकाइटिस, क्षय रोग इत्यादि के लिए बहुत लाभकारी है। छह औंस पानी में मुट्ठी भर पत्तियाँ डालकर इसका सूप बनाया जाता है, जिसे क्वथनांक तक उबाला जाता है। पाँच मिनट तक उबलने के बाद इसे आग से हटाकर ठंडा होने दें। इस सूप में नमक, काली मिर्च और नींबू का रस मिलाकर लेने से यह श्वास की गड़बडि़यों को दूर करता है।
  4. यौन अक्षमता : सहजन के फूलों को दूध के साथ उबालकर बनाया गया सूप लैंगिक असमर्थता को दूर करने के लिए बहुत उपयोगी टॉनिक है। यह पुरुषों और महिलाओं के बाँझपन में भी उपयोगी है। सूखी छाल का चूर्ण नामर्दी, शीघ्र स्खलन और वीर्य के पतलेपन में उपयोगी है। सूखी छाल का लगभग चार औंस चूर्ण 250 मि.ली. पानी के साथ लगभग आधा घंटा उबालना चाहिए और इस मिश्रण की एक औंस की मात्रा एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार महीने भर लेने से इन विकारों में सुधार होता है।
  5. पाचन संबंधी गड़बड़ी : सहजन पाचन संबंधी अनियमितताओं में भी लाभकारी है। इसकी पत्तियों का एक चम्मच ताजा रस निकाल कर उसको शहद और एक गिलास नारियल पानी के साथ दो या तीन बार हर्बल ओषधि के रूप में उपयोग कर सकते हो।
  6. मूत्र संबंधी अनियमितताएँ : स्कंदित ताजा पत्तियों का एक चम्मच रस ककड़ी या गाजर के गिलास भर ताजे रस के साथ लेना मूत्र में अति अम्लता के कारण होनेवाले अल्प मूत्र और मूत्र मार्ग में लगातार जलन के लिए प्रभावी ओषधि है। जो मधुमेह के रोगी नहीं हैं उनके लिए अत्यधिक मूत्र-त्याग के उपचार के लिए एक चम्मच रस 10 ग्राम नमक के साथ दिन में एक बार लिया जा सकता है।
  7. आँखों के विकार : तंत्रीय दुर्बलता, कॉर्नियल अल्सर, आँखों की जलन और खुजलाहट, पलकों के झपकने तथा फड़कने, बरौनियों के गिरने एवं विटामिन ‘ए’ की कमी के उपचार के लिए सहजन(sahjan moringa) की ताजा पत्तियों का रस निकालकर आँखों में डालने पर फायदेमंद होता है।

सहजन में मौजूद पोषक तत्व – sahjan moringa in hindi

सहजन की फलियाँ और पत्तियाँ कैरोटीन व विटामिन ‘सी’ का मुख्य स्रोत हैं। इसके प्रति 100 ग्राम खाद्य भाग में प्रोटीन 2.5, वसा 0.1, खनिज 2, रेशा 4.8 और कार्बोहाइड्रेट 3.7 प्रतिशत,कैल्सियम 30, फॉस्फोरस 110, लौह तत्त्व 5.3, थायमिन 0.05, रिबोफ्लोविन 0.07, नायसिन 0.2, विटामिन ‘सी’ 120 और कैरोटीन 110 माइक्रो ग्राम रहता है।

सहजन का चूर्ण patanjali

 

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