गायत्री मंत्र के प्रभाव एंव अलौकिक शक्तियाँ – Gayatri Mantra in Hindi

गायत्री महामंत्र सम्पूर्ण ब्रह्मांड का मूल आधार है। जब भारत में सभी गायत्री उपासना करते थे, तब भारत जगद्गुरु था, सारे विश्व का मार्गदर्शक था। जब से इसे प्रतिबंधित कर दिया गया, इस राष्ट्र के पतन-पराभव का क्रम आरंभ हो गया। इस लेख में गायत्री महामंत्र(Gaytri Mantra in Hindi) के प्रभाव एव चमत्कारिक की महत्ता बताने का प्रयास किया गया है की जीवन के उत्कर्ष के लिए गायत्री उपासना कितनी महत्त्वपूर्ण है।

गायत्री मंत्र क्या है – Gayatri Mantra in Hindi

‘गायेन त्रायते इति गायत्री’ जिसके गायन से प्राणों का त्राण हो वह गायत्री है। गायत्री वेदमाता है, देवमाता है, विश्वमाता है। ब्रह्माण्ड में विद्यमान समस्त ज्ञान का, देवत्व का और इस सारी सृष्टि का उद्भव गायत्री से ही हुआ है। गायत्री सर्वकामधुक् अर्थात गायत्री सभी श्रेष्ठ कामनाओं को पूरा करने वाली है। दुनिया का सारा ज्ञान गायत्री के चौबीस अक्षरों का ही विस्तार है। इसीलिए इसे दुनिया का सबसे छोटा धर्मग्रंथ गायत्री को
कहा जाता है।

Gayatri Mantra in Hindi– ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
गायत्री महामंत्र का अर्थ – उस प्राण स्वरूप, दुःख नाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप परमात्मा को हम अंतःकरण में धारण करें।वह परमात्मा हमें सन्मार्गकी ओर प्रेरित करे।

Gayatri Mantra के सामर्थ्य in Hindi

गायत्री उपासना से आत्मबल बढ़ता है और सद्बुद्धि का विकास होता है। गायत्री मंत्र के चमत्कारिक सामर्थ्य से गायत्री मंत्र दुनिया का सबसे प्रभावशाली मंत्र है। गायत्री गुरुमंत्र है, अर्थात् गायत्री की उपासना करने वाले साधक के अंतःकरण में ज्ञान का प्रकाश बढ़ता ही जाता है। और साधक की समस्याओं का समाधान स्वतः ही सूझने लगता है तथा मार्गदर्शन प्राप्त होने के योग भी स्वतः ही बन जाते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है- गायत्री छन्दसामहम्। अर्थात्-छन्दों में मैं गायत्री छन्द हूँ। जब हमें अपनी खोई हुई सामर्थ्य को पुनः अर्जित करना है तो उसका आधार गायत्री ही है!

पिछली शताब्दी के आठवे दशक में साप्ताहिक पत्रिका ‘ब्लिट्ज’ के सम्पादक श्री आर.के. करंजिया ने परमाणु अस्त्री की होड़ से चिंतित वैज्ञानिक आर्थर कोसलर से पूछा था कि भारत अणु आयुधों का सामना कैसे कर सकता है? इसके जवाब में ऑर्थर कोसलर ने कहा था, “आपके पास गायत्री मंत्र है। यदि सभी भारतवासी एक साथ गायत्री मंत्र का पाठ करें तो उससे इतनी शक्ति उत्पन्न होगी कि हमलावारों के हौसले पस्त हो जायेंगे।”

गायत्री महामंत्र का प्रभाव

गायत्री मंत्र परमात्मा से की गई सद्बुद्धि की प्रार्थना है। इसका उच्चारण शरीर के सभी ऊर्जा केन्द्रों-चक्र-उपत्यिकाओं को स्पंदित कर उन्हें जाग्रत् करता है, जिससे आत्मशक्ति का जागरण होता है। सरल भाषा में समझना हो तो इसे जनरेटर की तरह समझा जा सकता है। जनरेटर चालू होते ही प्रकाश और ऊर्जा का संचार होने लगता है, उसी प्रकार गायत्री मंत्र के जप से शरीर में आत्मबल की वृद्धि होती है। आत्मबल बढता है तो मन और विचारों में पवित्रता-प्रखरता बढ़ती है। तब व्यक्ति में लोभ, मोह, भय, हताशा, निराशा की बेड़ियों को तोड़कर आदर्शों को अपनाने और अवांछनीयताओं को ठुकराने का साहस बढ़ता जाता है।

गायत्री मंत्र(Gayatri Mantra in Hindi) जप का अपना ही प्रभाव है, लेकिन जब उसे उसके भाव के साथ जपा जाता है तो उसकी सामर्थ्य कई गुना अधिक हो जाती है। आज संसार में अज्ञान, अभाव, अशक्ति है तो संसाधनों की कमी से नहीं, मानवीय दुबुद्धि के कारण ही है। उसी के कारण धन व्यसन में, शक्ति उत्पीड़न में, बुद्धि कुचक्र रचने में लगी है। गायत्री के उपासक में मंत्र में निहित भाव के अनुरूप सदबुद्धि का विकास होता है। परिणाम स्वरूप वह सन्मार्ग पर चल पड़ता है। गायत्री में ही विश्व की सारी समस्याओं का समाधान निहित है। गायत्री देव संस्कृति की जननी है, माता है, जो अपने हर बालक को प्यार और दुलार के साथ उज्ज्वल भविष्य के पथ पर अग्रसर करती है।

 

 

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