Zinc: स्वास्थ्य उत्प्रेरक जिंक के स्वास्थ्य लाभ और सावधानियाँ

मानव-शरीर को ज़िंक(Zinc) की आवश्यकता कम होती है लेकिन इसका शारीरिक वृद्धि तथा स्वास्थ्य में बहुत बड़ा योगदान होता है जो जन्म के पहले से ही आरंभ हो जाता है। किसी 70 कि.ग्रा. वाले सामान्य व्यक्ति के पूरे शरीर में ज़िंक की मात्रा 1.4 से 2.3 ग्राम हो सकती है। जिंक सभी ऊतकों में कम मात्रा में उपस्थित होता है। हड्डियों, दांतों तथा अग्न्याशय में जिंक की मात्रा अन्य ऊतकों से कुछ अधिक होती है। रक्त में ज़िंक की मात्रा प्रति 100 मि.ली. में 0.7 मि.ग्रा. होती है जबकि रक्त सीरम या प्लाज्मा में इसकी मात्रा प्रति 100 मि.ली. में 0.1 मि.ग्रा. होती है।

ज़िंक: Zinc

ज़िंक(Zinc) को अन्य कुछ इंजाइमों में भी पाया गया है जैसे पेंक्रिएटिक हारमोन इंसुलिन में। ज़िंक नीला-सफेद,धात्विक तत्व होता है। यह शरीर में अन्य घटकों के साथ संयोजन में पाया जाता है। भोज्य पदार्थों में पाए जाने वाले ज़िंक का लगभग 20 से 30 प्रतिशत शरीर में छोटी आंत द्वारा अवशोषित किया जाता है। यह अवशोषण तंतुओं, कैल्शियम, तांबा, फाइटेट तथा दालों में पाए जाने वाले फास्फेट द्वारा कम हो जाता है। एमिनो एसिड तथा पेप्टाइड ज़िंक के अवशोषण में वृद्धि करते हैं। शरीर में उपस्थित ज़िंक का लगभग 99 प्रतिशत कोशिकाओं में भंडारित होता है तथा शेष प्लाज्मा और कोशिका के बाहर द्रवों में। जिंक का उत्सर्जन मुख्यरूप से अग्न्याशय या पेंक्रिआज़ तथा आंतों के उत्सर्जन द्वारा होता है।

ज़िंक के कार्य:Zinc

ज़िंक की आवश्यकता स्वस्थ त्वचा तथा बालों, घावों के स्वास्थ्य लाभ तथा सफल गर्भ के साथ-साथ पुरुष की लैंगिक क्षमता के लिये भी होती है। यह बीमारी तथा संक्रमण से रक्षा करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। इसकी आवश्यकता विटामिन ए को रेटिना या दृष्टिपटल में ले जाने के लिये होती है। शरीर में लगभग सभी इंजाइमों को ज़िंक की ज़रूरत होती है। यह लंबे समय से ज्ञात तथ्य है कि अन्य वस्तुओं के साथ-साथ ज़िंक की आवश्यकता शारीरिक वृद्धि तथा लैंगिक परिपक्वता के लिये होती है।

ज़िंक(Zinc) के स्वास्थ्य लाभ

जिंक सल्फेट को मुंह द्वारा लेने से दीर्घकालिक त्वचा अल्सर तथा घाव के तेज़ी से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। इन समस्याओं से पीड़ित रोगियों के कोर्टिकोस्टेरायड उपचार के बाद भी उनके प्लाज्मा में अनेक सप्ताहों तक जिंक की कमी बनी रहती है।

मुहांसे : मुहांसे के रोगियों को ज़िंक से नया लाभ हुआ है। कुछ मामलों में इसने आश्चर्यजनक परिणाम दर्शाए हैं। जिंक को 50 मि.ग्रा. की नैदानिक खुराकों में दिन में तीन बार लेना चाहिए। सुधार के बाद इसकी मात्रा को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।

एक्ज़ीमा या खाज : ज़िंक को एक्ज़ीमा के इलाज में भी लाभदायक पाया गया है। इस त्वचा की समस्या से ग्रस्त अनेक लोगों ने जिंक सप्लीमेंट को आज़माया है तथा इससे लाभ प्राप्त किया है। इसकी प्रतिदिन की औसत खुराक 30 मि.ग्रा. होती है।

प्रोस्टेट रोग: प्रोस्टेट बढ़ने के मामलों में ज़िंक के प्रयोग को मददगार पाया गया है। इन रोगों में इस खनिज का लगभग 30 मि.ग्रा. प्रतिदिन लेना चाहिए।

सावधानियां : ज़िंक की अत्यधिक खुराक से शरीर में आयरन तथा तांबे की हानि हो सकती है। वेल्डिंग करने वाले लोगों में ज़िंक से विषाक्तता हो सकती है। जिंक आक्साइड की उच्च सघनता को श्वास में लेने पर ‘मेटल फ्यूम या ब्रास चिल्स’ नामक गंभीर रोग हो सकता है जिसमें बुखार, ठंड लगना,अत्यधिक लार आना, सिरदर्द तथा खांसी हो जाते हैं।

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