Chlorine: जीवन में क्लोरीन खनिज का महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभ

खनिज शरीर में जीवन प्रक्रियाओं के लिये पानी की आवश्यक मात्रा को बनाए रखने में सहायता करते हैं। वह कोशिकाओं में से रासायनिक पदार्थों को निकालते हैं। इस
प्रकार रक्त तथा ऊतक द्रवों को अधिक एसिडिक या अम्लीय बनने से रोकते हैं। खनिजों का महत्त्व इस तथ्य से प्रदर्शित होता है कि शरीर में 50,000 से अधिक इंज़ाइम होते हैं जो वृद्धि तथा ऊर्जा में सहायक होते हैं। प्रत्येक इंज़ाइम खनिज तथा विटामिन के साथ जुड़े होते हैं। प्रत्येक खनिज शरीर में कुछ-न-कुछ विशेष कार्य करता है और उनमें से कुछ समूह बनाकर अतिरिक्त कार्य भी करते हैं जिससे शरीर की कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। इस प्रकार खनिज शारीरिक कार्यों में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं तथा प्रत्येक मानव-कोशिका में उपस्थित रहते हैं। हालांकि उनकी आवश्यकता बहुत कम होती है लेकिन उनकी कमी से भी शरीर में विक्रिया हो सकती है। इनकी अनुपस्थिति से थकान,चिड़चिड़ापन, भुलक्कड़पन, घबराहट, तनाव तथा कमज़ोरी आदि हो सकते हैं।

क्लोरीन के कार्य – Chlorine

क्लोरीन(Chlorine) हरी-पीली रंगत का, विषीय और गैसीय तत्व होता है जिसकी दमघोंटू गंध होती है। यह अधिकांशतः सोडियम क्लोराइड या सामान्य नमक के रूप में शरीर में उपस्थित होता है जो अनेक प्रकार के आवश्यक कार्य करता है। कार्बन डायक्साइड के उचित वितरण के लिये तथा ऊतकों में ओस्मोटिक दाब को बनाए रखने के लिये क्लोराइड अनिवार्य है। यह ग्रन्थिक हारमोन उत्सर्जन के उत्पादन के लिये आवश्यक होता है तथा अत्यधिक वसा बनने से और आटो-इंटोक्सिकेशन (स्वतः विषाक्तीकरण) को रोकता है। क्लोराइड रक्त में क्षारीय-एसिड संतुलन का नियमन करता है। यह पोटाशियम के साथ यौगिक रूप में कार्य करता है। पोटाशियम क्लोराइड भी पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के उत्पादन के लिये आवश्यक होता है जिसकी ज़रूरत प्रोटीन के उचित पाचन के लिये होती है। यह तंत्र में उचित द्रव तथा इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाता है।

Chlorine के स्रोत

क्लोराइड जौ, गेहूं, अन्य अनाजों तथा दालों, हरी पत्तेवाली सब्ज़ियों और फलों जैसे तरबूज़ एवं अनानास में पाया जाता है। जिस क्लोराइड का सेवन हम अधिकांशतः करते हैं वह सोडियम क्लोराइड के मिश्रित रूप में होता है। इसलिये वह भोजन जिनमें सोडियम की बड़ी मात्रा होती है उनमें क्लोराइड भी उसी अनुपात में उपस्थित होता है तथा इसका विपरीत भी सत्य है।

क्लोरीन अभाव के लक्षण

क्लोराइड की न्यूनता तब हो सकती है जब सामान्य ओडीमा या उच्च रक्तचाप के सक्रिय चरण में सोडियम क्लोराइड को सीमित कर दिया जाये। इसके कारण पैदा होने वाले लक्षण वैसे ही होते हैं जैसे सोडियम क्लोराइड की कमी के कारण होते हैं। पसीने के रूप में शरीर से लवण की अत्यधिक हानि के कारण हीट जप (heat creamps) हो सकते हैं। इसकी कमी से बालों तथा दांतों की क्षति और भोजन का अनियमित पाचन हो सकता है तथा शरीर में द्रव स्तर गड़बड़ा सकता है।

क्लोरीन के स्वास्थ्य लाभ

Chlorine का प्रयोग यूसोल (eusol) के रूप में लेने पर, जिसमें हाइपोक्लोरस एसिड होता है, क्लोराइड का प्रयोग दीर्घकालिक अल्सर का विसंक्रमण करने के लिये होता है लेकिन इसका प्रयोग सीमित होता है क्योंकि अत्यधिक जैविक द्रव्य के कारण इसका कार्य बन्द हो जाता है।

सावधानियां : Chlorine की गैस विषाक्त होती है। क्लोरीन गैस से पीड़ित रोगी जब स्वास्थ्य लाभ करता है तो उसमें फेफड़े का ओडीमा विकसित हो सकता है तथा वह गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है। ऐसे मामले में आक्सीजन का प्रयोग करना चाहिए। क्लोरीन का प्रयोग रंग उड़ाने (ब्लीचिंग) में तथा कुछ घरेलु प्रकार की ब्लीचिंग में भी होता है। यदि इसे निगल लिया जाये तो पेट, आहारनली तथा मुंह गंभीर रूप से क्षोभित हो जाता है।

 

1 thought on “Chlorine: जीवन में क्लोरीन खनिज का महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभ”

Leave a Comment