ब्लड सर्कुलेशन और रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद होता है मेडिटेशन/Om jaap

ओम को हिन्दू धर्म में महामंत्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि संपूर्ण सृष्टि का वास इस जाप में है और यही कारण है कि इसका हमेशा जप करना ईश्वर को प्रसन्न करने का सरल तरीका है। ओम केवल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। दूसरे धर्मो में भी इसकी मान्यता है। यद्यपि ओम की कोई परिभाषा नहीं दी गई हैं फिर भी इसे अंतरिक्ष की मौलिक ध्वनि माना जाता हैं जो सभी ध्वनियों का मूल है। ईसाइयों द्वारा उपयोग किया जाने वाला आमेन शब्द भी ओम से ही अस्तित्व में आया हुआ माना जाता हैं. ओम (Om Jaap) का उच्चारण किसी भी पोजिशन में बैठ कर किया जा सकता हैं। अपनी आंखें बंद करके गहरी सांस लें और फिर ओम (ॐ) का उच्चारण करें।  ॐ का उच्चारण करते समय कान बंद कर लेंगे तो इससे और भी ज्यादा फायदा होगा। ओम मंत्र तीन अक्षरों = आ, ऊ और म से बना है। यह एक सार्वभौमिक मंत्र है और अपने सकारात्मक वाइब्रेशन से पर्यावरण को शुद्ध करता है। आजकल तनाव भरी जिंदगी में मेडिटेशन हमे शांति और सकारात्मक सोच प्रदान करता है। आज हम Om jaap For Meditation और Om jaap के फायदों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

Om jaap के फायदे

ॐ आत्मिक बल देता है। Om Meditation के 7 बार के उच्चारण से शरीर के कीटाणु दूर होने लगते हैं। यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने सभी मंत्रों के आगे ॐ जोड़ा है। ओम मंत्र का जाप करने से एकाग्रता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। ओम के जाप से होठ, जीभ, तालू, गले के पिछले हिस्से और खोपड़ी में कंपन पैदा होता है, जो मन को शांत करने में मदद करता है। आइए जानते है इस जाप से क्या फायदे होंगे।

ओम के जाप से हमारा ब्लड सर्कुलेशन नियंत्रित रहता है जिससे हृदय एक नियमित लय के साथ धड़कता है। यदि हम ओम का जाप करते समय अपने हाथों को आपस में रगड़ते हैं और उन हाथों को शरीर के विभिन्न भागों पर लगाते हैं तो हम शरीर के उन क्षेत्रों को ठीक कर सकते हैं या सक्रिय कर सकते हैं। जप करते समय यदि हम तीसरे या आध्यात्मिक नेत्र पर ध्यान केन्द्रित करें, तो हमारी अंतर्ज्ञान की शक्ति में भी तेजी से सुधार होता है।

ओम का उच्चारण रीढ़ की हड्डी की सहायक मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है। ओउ ध्वनि से थायरॉयड ग्रंथियों और गले को बहुत फायदा होता है। ओम के उच्चारण से हम अपनी भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे, इस प्रकार हम स्थितियों को स्पष्ट और तर्कसंगत दिमाग से देख पाएंगे। अध्ययनों से पता चला है कि ओम मंत्र के जाप से आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि होती है जिससे हमारे चेहरे पर एक चमक दिखाई देगी।

ओम के उच्चार की विशेष ध्वनि और इससे उत्पन्न होने वाले कंपन मस्तिष्क को सक्रिय बनाने का काम करते हैं। ओम का जप हृदय और चयापचय की गति को धीमा करता हैं जिनसे शारीरिक विश्राम की अवस्था निर्मित होने के कारण मानसिक चेतना बढ जाती है। ओम के जप पर हुए विविध शोधों ने भी यह प्रमाणित किया हैं कि इस जप से एकाग्रता बढती हैं, मस्तिष्क की ग्रहण शक्ति और स्मृति बढती हैं तथा थकान कम हो जाती है।

 

मौन के पार की ध्वनि लोग बातचीत इसलिए करते हैं क्योंकि मौन की तुलना में ध्वनि को सहन करने की शक्ति रखते हैं। हममें से अधिकतर लोगों के लिए जब मुख शांत होता हैं तब भी मन में विचारों की हलचल मची रहती हैं और मन की इस हलचल से हमारी वाणी प्रभावित होती हैं, मुख से निकले शब्द प्रभावित होते हैं। अत: मुख की शांति की अपेक्षा मन की शांति अधिक आवश्यक होती है। मौन का अर्थ मन में व्याप्त शांति से हैं जो हमें हमारे अंतर्मन की आवाज सुनने लायक बनाती है।

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

OM…… OM….. OM…… OM…… OM…… OM……

Om Jaap करने के तरीके

१. जोर से उच्चार करके २. धीरे से उच्चार करके ३. मानसिक उच्चार से

Om Jaap अभ्यास के प्रारंभिक चरण में जोर से उच्चार करना चाहिए ताकि मन के सारे संकोच और दुविधाएं जो स्व चिकित्सा में सबसे बडी रुकावट पैदा करते हैं दूर हो जाते है। उसके बाद व्यक्ति धीमी आवाज में उच्चार कर सकता हैं जो सिर्फ उसे ही सुनाई दे। जैसे जैसे जागरुकता बढती जाए मन में जप शुरु किया जा सकता है। यदि मानसिक जप करते-करते नींद का अनुभव हो तो जप पुन: जोर से करना चाहिए।

Om Meditation Patanjali

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