नवग्रह शांति स्त्रोत्र और ग्रह शांति के लिए क्या करना चाहिए? ! Navgrah

नौ ग्रह हमारे द्वारा किये गए पूर्व कृत कर्म के आधार पर रोग, शोक, और सुख, ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। Navgrah पीड़ित व्यक्ति ग्रह के दंड को पहचान कर उक्त ग्रह की अनुकूलता हेतु उक्त ग्रह का रत्न धारण करता है तो वह सुखी बन सकता है। इस लेख में हम आपको नवग्रह शांति  दान सामग्री के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे |

नवग्रह/Navgrah की शान्ति के लिए दान सामग्री

सूर्य ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : माणिक, गेहूँ, गुड़, कमल का पुष्प, नूतन गृह, रक्त चन्दन, लाल वस्त्र, सोना. ताँबा, केशर, वर्ण दक्षिणा, जपसंख्या ७००० कलियुग में चौगुणा । दान का समय – सूर्योदय काल ।

चन्द्रमा ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : श्वेत चावल, श्वेत वस्त्र, श्वेत चन्दन, श्वेत पुष्प, चीनी, चाँदी, घी, वृषभ. दहीं, मोती, कर्पूर, वर्ण दक्षिणा, जप संख्या ११००० कलियुग में चौगुणा। दान का समय-सांयकाल ।

मंगल ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : मूंगा, पृथ्वी, मसूर, तुलसी, गेहूँ रक्तवृषभ, गुड़, रक्त चन्दन, रक्त वस्त्र, रक्त पुष्प, सोना, ताँबा, केशर, कस्तूरी, वर्ण दक्षिणा, जप संख्या १०००० कलियुग में चौगुणा। दान का समय – सूर्योदय के बाद एक घंटा तक ।

बुध ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : कांस्य पात्र, हरित वस्त्र, हाथी का दाँत, घी, हरा मूंग, पन्ना, सोना, अनेक प्रकार के पुष्प, रत्न, कपूर, अनेक फल, षट्रस भोजन, वर्ण दक्षिणा, जप संख्या ९०००, कलियुग में चौगुणा । दान का समय – सूर्योदय के बाद दो घंटे तक ।

गुरू ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : पीतधान्य, पीला कपड़ा, सोना, घी, पीला फूल, पीलफल, पुखराज, हल्दी, पुस्तक, मधु, नमक, चीनी, भूमि, छत्र, वर्ण दक्षिणा, जप संख्या १९०००, कलियुग में चौगुणा । दान समय-संध्या काल ।

शक्र ग्रह को शांत करने की दान सामग्री: श्वेतचन्दन, श्वेत चावल, श्वेत चित्र, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, चांदी, हीरा, घी, सोना, दही. श्वेत अश्व, इत्र, चीनी, गाय, भूमि, वर्ण दक्षिणा, जपसंख्या 80001 कलियुग में चौगुणा । दान समय-सूर्योदय काल ।

शनि ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : नीलम, काला तिल, काला उड़द, काला कपड़ा, लोहा, काली गाय, कष्ण पष्प सोना. वर्णदक्षिणा, जपसख्या २३००० । कलियुग में चौगणादान दान समय-मध्याह्न

राह ग्रह को शांत करने की दान सामग्री:   सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज), काला उड़द, नीला कपडा फल चाक. बकरा, शस्त्र, सप्तधान्य, (सात प्रकार के अन सख्या १८०००, कालयुगमचागुणा । दान का समय-रात्रि ।

केतु ग्रह को शांत करने की दान सामग्री : कम्बल,कस्तूरी, काला उड़द, वैदूर्य मणि, कृष्णपुष्प, काला तिल, तेल, रत्न, सोना, शस्त्र, सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज), वर्ण कलियुग में चौगुणा । दान का समय-रात्रि ।

नवग्रह समिधा और बीज मंत्र

Navgrah के साथ यात्रा मुहूर्त

हमे यात्रा शुरू करने से पहले शुभ यात्रा मुहूर्त देख कर ही जाना चाहिए | क्यूंकि सही मुहूर्त से काम प्रारम्भ करने पर वह सफल होता है |

यात्रा के लिए शुभ नक्षत्र : हस्त, मघा, श्रवण, अश्विनी, मृगशिरा, पुर्नवसु, पुष्य, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती नक्षत्र में यात्रा अति उत्तम । रोहिणी, तीनो उत्तरा, तीनो पूर्वा व मूल मध्यम है। शेष नक्षत्र वर्जित है।

यात्रा के लिए शुभ वार का निर्णय गन्तव्य स्थान की दिशा से होता है। यात्रा के दिन दिशा शूल वयोगिनीव काल राह पीठ पीछे या बायें होना चाहिए । चन्द्र सन्मुख या दाहिने होना चाहिए।

यात्रा के लिए शुभ दिशा शूल : सोम, शनि की पूर्व में, मंगल, बुध को उत्तर में, रवि शुक्र को || पश्चिम में एवं गुरूको दक्षिण में रहती है।

यात्रा के लिए शुभ चन्द्रवास: 1.मेष, सिंह, धनु का चन्द्र पूर्व में 2.वृष, कन्या, मकर का चन्द्र दक्षिण मे 3.कर्क, वृश्चिक, मीन का चन्द्र उत्तर में
4.मिथुन, तुला, कुंभ का चन्द्र पश्चिम में .

यात्रा के लिए शुभ शुभहोरा – चन्द्र, बुध, गुरू, शुक्र श्रेष्ठ

यात्रा के लिए शुभ चौघड़िया- अमृत, शुभ, लाभ, चर

यात्रा के लिए शुभ शकुन विचार : यात्रा के समय लोहा, तैल, घास, मटका, पत्थर, लकड़ी, || बिलाव मिले तो अशुभ । दहीं, चावल, चांदी, पानी का घड़ा, पुष्प, हंस तथा मुर्दा हो तो शुभ।
नवग्रह , 

 

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