क्या होता है पितृदोष निवारण के उपाय और कारण ! Pitra Dosh

पितृदोष क्या होता है : जन्म कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतर्थ, पंचम सप्तम नवम व दशम भावों में से किसी एक भाव पर सूर्य-राहु अथवा सूर्य-शनि का योग हो तो जातक को पितृदोष(Pitra Dosh) होता है। पितृदोष जिस भाव में होता है उसीके अनुसार ही अशुभ फल होता है! जैसे प्रथम भाव में सूर्य-राहु अथवा सूर्य-शनि आदि अशुभ योग हो तो जातक अशान्त, गुप्त चिन्ता, दाम्पत्य एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां होती है।

दूसरे भाव में यह याग बने तो परिवार में वैमनस्य व आर्थिक उलझनें हों.चतर्थ भाव में पितृयोग के कारण भाम, मकान, माता-पिता एवं गह-सख में कमी या कष्ट होते हैं। पंचम भाव में उच्च विद्या म विध्न व सन्तान सुख में कमी होने के संकेत है। सप्तम भाव में यह योग वैवाहिक सुख में बाधक, अष्टम में हो तो पैतृक सुख में कमी अथवा पिता के सम्बन्ध में चिन्ता होती है! नवम भाव में भाग्योन्नति में बाधाएं तथा दशम भाव में पितृ दोष हो तो सर्विस या कार्य व्यवसाय सम्बन्धी परेशानियां होती है। सूर्य यदि नीच राशि का होकर राहुया शनि के साथ पड़ा हो तो पितृदोष कृत अशुभ फलों में और भी अधिक वृद्धिकारक होता है।

 

पितृदोष निवारण के उपाय! Pitra Dosh Nivaran

उपरोक्त उपायों के अतिरिक्त सामान्य उपाय करने भी पितृ आदि दोषों की शान्ति में लाभप्रदायक सिद्ध होगें।

(1) अपने गृह की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने दिवंगत पूर्वजों के फोटो लगाकर उन पर हार चढ़ाकर सम्मानित करना चाहिए तथा उनकी मृत्यु तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र एवंदक्षिणा सहित दान, पितृतर्पण एवं श्राद्ध कर्म करने चाहिए।

(2) जीवित मातापिता एवं भाई-बहनों का भी आदर-सत्कार और धन, वस्त्र भोजनादि से सेवा करते उनके द्वारा आशीर्वाद ग्रहण करते रहें।

(3) हर अमावस को अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल पर गंगाजल, थोड़े काले तिल, चीनी, चावल, जल, पुष्पादि चढाते हए ॐ पितभ्यः नमः मन्त्र तथा पितृ सूक्त का पाठ करना शुभ होगा।

(4) हर अमावस के दिन दक्षिण मुख होकर दिवगत पितरा के लिए पितृ तर्पण करना तथा त्रयोदशी को नीलकण्ठ स्तोत्र का पाठ करना

(5)पंचमी स्तोत्र को पितृसूक्त का पाठ करना तथा त्रयोदशी को नीलकण्ठ स्तोत्र का पाठ करना चाहिए !

(6)पूर्णिमा के दिन नारायण कवच का पाठ करके ब्राह्मणों को मिष्ठान व दक्षिणा सहित भोजन करना पितृ दोष शांति में शुभ होता है।

(7) हर संक्रान्ति, अमावस एवं रविवार को सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल-चन्दन गंगाजल, शुद्ध जल डालकर तीन बार अर्ध्य देवें।

(8) श्राद्ध के दिनों विशेषकर तामसिक भोजन तथा पराये अन्न से परहेज करना चाहिए।

(9) सोमवार के दिन आक के२१ पुष्पों,कच्ची लस्सी, बिल्व पत्रादि सहित श्रीशिवजी की पूजा करने से पितृ दोष का शमन होता है।

(10) पीपल वृक्ष पर मध्यान्ह को काजल, पुष्पाक्षत, दूध, गंगाजल,काले तिल आदि चढाएं व सायं को दीप जलाए तथा महामृत्युंजय मंत्र, या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र, नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने से तथा ब्राह्मण भोजन कराने से पितृ दोष की शान्ति होती है।

(11) कुल देवता एवं इष्ट देव की भी पूजा, अर्चना करनी चाहिए।

इसके अतिरिक्त सर्प पूजा, ब्राह्मणों को गोदान, कुआं खुदवाना, पीपल व बरगद के वृक्ष लगवाना, विष्णु मंत्रों का जप करना, श्रीमद्भगवद् गीता का पाठ करना, माता-पिता का आदर करना, पितरों के नाम से अस्पताल, मंदिर, विद्यालय, धर्मशाला आदि बनाने से भी पितृ आदि दोषों की शांति होती है। श्रीमद् भागवत कथा का पाठ कराने से भी पितृदोष(Pitra Dosh) से मुक्ति मिलती है।

Pitradosh Wikipedia

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