श्री ढांढ़ण सती जी की आरती ! रानी सती दादी जी


ढांढ़ण धाम(श्री ढांढ़ण सती/रानी सती दादी जी ) राजस्थान राज्य के सीकर जिले की फतेहपुर की तहसील में स्थित है। यह स्थान दो बहनों के अपने भाई के प्रति प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। टीडा और गेला नाम की बहनें अपने भाई भोलेनाथजी के साथ ढांढ़ण में रहती हैं। एक बार बड़े भाई भोलेनाथजी गायों को चराने के लिए एक जंगल में गए जहां एक सांप ने उनकी जान ले ली। बहनों ने सांप से अपने भाई के जीवन को वापस देने के लिए कहा, नहीं तो वे पूरे सांप समाज को बर्बाद कर देंगे। तब नाग देवता प्रकट हुए और कहा कि वह उस लड़के की जान लेने वाले थे जिसके पैर पर एक चक्र का निशान था। सर्प देवता ने कहा कि भाई का जीवन वापस नहीं दिया जा सकता है। बहनें तब देवी दुर्गा का अवतार बन गईं।

शीशवाल गांव हरियाणा राज्य से बहुत दूर स्थित है और यहां तक ​​लोगों का आना-जाना बहुत मुश्किल है। देवी के कुछ भक्तों ने उनसे अनुरोध किया की मंदिर को फतेहपुर की तहसील में बनाने का फैसला किया क्योंकि इस तहसील से सबसे अधिक भक्त थे। लेकिन जब बजाज भारतीय परिवार प्रतिमा के रूप में 6 ईंटें शीशवाल से तहसील तक ले जा रहा था, रास्ते में उनके मन में एक छोटा सा संदेह आया और उन्होंने ढांढन में एक जगह साफ कर ईंटें रख दीं. वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले हुई आकाश वाणी को भूल गए थे कि वे जिस स्थान पर ईंटें रखेंगे, उसी स्थान पर मंदिर बनाना होगा। कुछ देर बाद जब उन्होंने ईंटों को उठाने की कोशिश की तो वे एक इंच भी नहीं हिल सके और फिर एक आकाश वाणी हुई जिसमें कहा गया कि अब मंदिर बनाना होगा।

श्री ढांढ़ण सती दादी जी की आरती ! रानी सती दादी जी

 

जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया, जय श्री ढांढण सतीजी।

अपने भक्तजनों की, दूर करै विपती ।। जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया।।

अवनी अनन्तर ज्योति अखण्डित, मण्डित चहुँ कुकुभा ।

दुरजन दलन खड़ग की, विधुत सम प्रतिभा ।। जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया॥

मरकत मणि मन्दिर अति मंजल, शोभा लखि न पड़े।

ललित ध्वजा चहँ ओरे, कंचन कलश धरे ।। जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया।।

किन्नर गायन करते. वेद ध्वनि उचरे।।जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया।।

सप्त मातृका करे आरती, सुरगण ध्यान धरे।

विविध प्रकार के व्यंजन, श्रीफल भेंट धरे।। जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया॥

संकट विकट विदारिणी, नाशनी हो कुमती ।

सेवक जन हृदय पटले, मृदुल करन सुमति ॥जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया॥

अमल कमल दल लोचनी, मोचनी त्रय तापा।

दास आयो शरण आपकी, लाज रखो माता ॥ जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया॥

या टीडा-गेला मैयाजी की आरती, जो कोई नर गावे।

सदन सिद्धि नव निधि, मनवाछित फल पावे॥जय श्री ढांढ़ण सतीजी मैया॥

Rani Sati Dadi ji 

 

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