Vitamin B6 (Pyridoxine): पाइरिडोक्सिन विटामिन B6 के स्रोत एंव अभाव के लक्षण

Vitamin B6 सफेद स्फटिक पदार्थ है। यह पानी तथा एल्कोहल में घुलनशील होता है। दीर्घकालिक भंडारण, खाद्य-सामग्री को डिब्बों में बंद रखना, मांस को भूनना या पकाना, भोजन-प्रक्रिया, एल्कोहल तथा ओस्ट्रोजन (oestrogen) इस विटामिन को नष्ट करने वाले कारक हैं । विटामिन बी6 मुख्यरूप से जेजुनम (छोटी आंत का एक भाग) में अवशोषित होता है। लेकिन यह छोटी आंत के इलियम में निष्क्रिय डिफ्यूजन (फैलने) द्वारा भी अवशोषित होता है। हालांकि बड़ी आंत में बैक्टीरिया विटामिन बी6 के साथ संश्लेषण करते हैं लेकिन यह अधिक मात्रा में अवशोषित नहीं किये जाते। इस विटामिन की कम मात्रा ही शरीर में एकत्र रहती है।

Vitamin B6 (Pyridoxine)

1926 में जे. गोल्डबर्जर तथा आर. डी. लिली ने सुझाव दिया कि पाइरिडोक्सिन को विटामिन बी6 कहा जाये। यह विटामिन विभिन्न ऊतकों में वितरित होता है। यह मुख्यरूप से गुरदों द्वारा उत्सर्जित होता है और गौण रूप से मल तथा पसीने में। शरीर में कार्य पाइरिडोक्सिन प्रोटीन तथा वसा विशेषकर वसायुक्त एसिड के पाचन में सहायता देता है। यह अनेक इंज़ाइमों तथा इंज़ाइम तंत्रों को सक्रिय बनाता है। यह शरीर के रोगनाशक द्रव्यों के उत्पादन में योगदान देता है जो बैक्टीरिया द्वारा होने वाले रोगों से रक्षा करते हैं। पाइरोडोक्सिन स्नायु तंत्र तथा मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद देता है। यह संतानोत्पत्ति प्रक्रिया तथा स्वस्थ गर्भाशय के लिये आवश्यक है। यह विटामिन स्नायविक तथा त्वचा सम्बन्धी व्याधियों की रोकथाम करता है, उच्च कोलेस्ट्रोल, कुछ प्रकार के हृदय रोगों तथा मधुमेह के विरुद्ध कार्य करता है। यह दांतों को सड़ने से बचाता है। विटामिन बी6 शरीर में सोडियम तथा पोटाशियम के संतुलन को नियमित बनाता है जो सामान्य शारीरिक कार्यों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं। यह विटामिन बी12 के अवशोषण के लिये और हाइड्रोक्लोरिक एसिड एवं मैग्नीशियम के उत्पादन के लिये भी आवश्यक होता है।

Vitamin B6 (Pyridoxine) के स्वास्थ्य लाभ

मधुमेह से पीड़ित सभी लोग जेनथुरेनिक एसिड (xanthurenic acid) का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन करते हैं जो विटामिन बी6 की कमी का संकेत होता है। प्रयोगों ने दर्शाया है कि विटामिन बी6 की 50 मि.ग्रा. की मात्रा प्रतिदिन मधुमेह के रोगियों को देने से उनमें मूत्रीय उत्सर्जन की मात्रा में तीव्र कमी आती है। बवासीर के इलाज में विटामिन बी6 को मूल्यवान पाया गया है। विटामिन बी6 की कमी से पीड़ित व्यक्तियों पर प्रयोग किए गए तथा यह पाया गया कि वह रक्तप्रवाह वाली बवासीर से परेशान थे। जब उन्हें विटामिन बी6 की 10 मि.ग्रा. मात्रा प्रत्येक भोजन के बाद दी गयी तो उन्हें जल्द-ही आराम मिला। स्त्रियों में गर्भावस्था के दौरान विटामिन बी6 की सामान्यतया कमी हो जाती है, इस विटामिन की कमी के कारण उनमें बवासीर हो सकती है जो इस काल में सामान्य है।

नवजात शिशु जिन्हें पाउडर का दूध दिया जाता है उनमें सामान्यतया Vitamin B6 की कमी पायी जाती है। इसकी कमी से बिना बुखार के ऐंठन हो जाती है। 0.5 से 10 मि.ग्रा. की विटामिन बी6 की खुराक प्रतिदिन तीन बार लेने से ऐंठन में आराम मिलता है। यह भी पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान कुपोषित महिलाओं में सामान्यतया विटामिन बी6 की कमी हो जाती है जिसका कारण भ्रूण की अत्यधिक मांग होती है। इस कमी से भ्रूण के केंद्रीय स्नायु तंत्र के विकास पर प्रभाव पड़ता है। इसके कारण एपिलेप्सी या मिर्गी के दौरे आते हैं। ऐसी सभी परिस्थितियों में, जहां पर ऐंठन का कोई संभावित या ज्ञात कारण नज़र नहीं आता, विटामिन बी6 के 50 मि.ग्रा. का प्रयोग, दिन में तीन बार बहुत लाभदायक है।

युवतियों में दीर्घकालिक अनियमितरूप से होने वाले योनि रक्तप्रवाह में Vitamin B6 का इलाज सफल पाया गया है। विटामिन बी6 ओस्ट्रोजन की सक्रियता को तथा रोमछिद्रों को पकने से रोकता है, जिससे रक्तप्रवाह पर नियंत्रण हो जाता है।  Vitamin B6 का प्रयोग केंद्रीय स्नायु तंत्र को शांत करने में लाभदायी है जिससे साइकोन्यूरोसिस (psychoneurosis), मानसिक चिड़चिड़ापन और तनाव, कमज़ोरी, अनिद्रा से बचने में मदद मिलती है। इन सभी अवस्थाओं में, विटामिन बी6 की 40 मि.ग्रा. की खुराक दिन में तीन बार देनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान सुबह-सुबह चक्कर आना, उल्टी होना आदि में Vitamin B6 का प्रयोग लाभदायक पाया गया है। इसको शांत करने से यह यात्रा के दौरान भी कम हो जाता है। इस विटामिन के अत्यधिक संतोषजनक परिणामों को प्राप्त करने के लिये, इसे गर्भावस्था के दौरान भी बहुत सुबह 40 मि.ग्रा. की मात्रा में दिया जा सकता है तथा यात्रा से एक घंटा पहले भी। यदि बीमारी की भावना बनी रहती है तो इस खुराक को चार घंटे बाद दोबारा दिया जा सकता है।

Vitamin B6 (Pyridoxine) के स्रोत

पौधों से प्राप्त होने वाले भोजन में खमीर, सनफ्लावर के बीज, गेंहू के जीवाश्म, सोयाबीन तथा अखरोट पाइरीडोक्सिन के सर्वाधिक समृद्ध स्रोत हैं। दालें, लीमा बीन तथा अन्य सब्ज़ियों में यह उचित मात्रा में मिलता है।

Vitamin B6 (Pyridoxine) के अभाव के लक्षण

विटामिन बी6 के अभाव से रक्ताल्पता, ओडीमा, मानसिक तनाव तथा त्वचा-सम्बन्धी व्याधियां हो सकती हैं। होंठों के कोनों में फटन, मुंह में दुर्गंध, घबराहट, एक्ज़ीमा, गुरदे की पथरी, आंत का शोथ, पित्ताशय (pancreas) की क्षति, अनिद्रा, दांतों की सड़न, चिड़चिड़ापन, पेशीय नियंत्रण में कमी, माइग्रेन सिरदर्द, बुढ़ापा-सम्बन्धी बिमारियां तथा असामयिक मानसिक कमज़ोरी आदि भी विटामिन बी6 की न्यूनता के परिणाम हैं।

सावधानियां : विटामिन बी6 में विषाक्तता कम होती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बी6 को कभी भी लिया जा सकता है। विटामिन बी6 को बड़ी मात्रा में तब तक नहीं लेना चाहिए जबतक रोगी में इसका अभाव न पाया जाये। ऐसे रोगी जिन्हें इसकी बड़ी खुराक दी जा रही है उनमें एक संभावित लक्षण रात्रि में बेचैनी हो सकती है।

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