क्या है बच्चो में निमोनिया के लक्षण एंव कारण – Pneumonia In Hindi

बच्चों में निमोनिया रोग मामूली सर्दी जुकाम से शुरु होकर गंभीर निमोनिया का रुप ले लेता है। जाड़े के दिनों में इसके होने की अधिक संभावना होती है। निमोनिया से जान गवाने वाला हर पांचवा बच्चा भारत का होता है। डब्लू एच ओ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर घंटे 45 बच्चों की जान निमोनिया के कारण चली जाती है। आमतौर पर बच्चों में इसे पस्ली चलना या छाती जाम होना कहा जाता है। फेफड़े में मामूली संक्रमण बढ़ जाने पर फेफड़ों में सूजन बन जाती है और सांस लेने में तकलीफ हो जाती है। बच्चों में विशेष रुप से सांस की दिक्कत बढ़ने पर मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है निमोनिया के लक्षण ? – Stmptoms of pneumonia

बच्चों में निमोनिया के लक्षण हल्के सर्दी जुकाम से शुरु होकर तेज़ बुखार आना, मांसपेशियों में दर्द, कंपकपी आना, सांस की गति का तेज़ हो जाना है। ऑक्सीजन की कमी से कभी-कभी ओठ व उंगली के नाखूनों का रंग नीला पडने लगता है। बच्चे दूध पीने में तकलीफ महसूस करते हैं। तेज खांसी के साथ उल्टी भी हो जाती है। सांस लेने में जोर पड़ने पर बच्चों के नथने फूलने लगते हैं तथा पसली में घर-घर की आवाज आती है। कभी-कभी खाँसते खाँसते बच्चे को गहरा भूरा, हरा या खून मिला हुआ लाल बलगम आ सकता है।

निमोनिया के कारण क्या है ? – Causes of pneumonia

फेफड़ों में तीव्र संक्रमण इसका कारण है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि के कारण फेफड़े में सूजन आ जाती है। बच्चों में रेस्पिरेट्री सिनसीशियल वायरस (आर एस वी) नामक विषाणु ज्यादातर मुख्य कारण होता है। फेफड़े में पानी भर जाने के कारण सांस लेने में दिक्कत आते आने लगती है। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं पिलाया जाता, उनमें निमोनिया का 15 गुना ज्यादा खतरा होता है। आयुर्वेद में इसे श्वसनक ज्वर कहा जाता है। मुख्य रुप से कफ़ एवं वात की दुष्टि होने पर निमोनिया होता है | कफ़ के प्राणवायु के स्रोत में एकत्रित हो जाने से ऑक्सिजन का प्रवाह ठीक ढंग से नहीं हो पाता। तेज बुखार के साथ बच्चे में कभी-कभी बेहोशी आने लगती है। सांस अधिक चलने से शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है।

बचाव के उपाय क्या है – Pneumonia In Hindi

निमोनिया से बचने का भरसक प्रयास करना चाहिए। खासते तथा छींकते समय मुंह पर हाथ रखें। संक्रमित व्यक्ति के पास चेहरे पर मांस्क लगाकर जाएं। संपर्क में आने पर हाथ एंटीसेप्टिक घोल से अवश्य धोएं। खाली पेट ना रहे, जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। पानी भी अधिक पिए तथा डिहाइड्रेशन होने से बचे। बेहतर यह है कि हल्के गुनगुने पानी का सेवन करें। भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें | धुए से बचकर रहें। समय से पहले पैदा होने वाले, प्रीमेच्योर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनमें निमोनिया के संक्रमण का खतरा अधिक होता है। आजकल बच्चों में संक्रमण से सुरक्षा हेतु न्यूमोकोकल वैक्सीन आदि भी लगाई जाती हैं। टीकाकरण हेतु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। खासतौर पर प्रदूषण के प्रभाव से बच्चों को बचा कर रखें। बदलते मौसम का ध्यान रखें। बच्चों को गर्म ऊनी कपड़े पहना कर रखें।

क्या है उपचार ? – Treatment of pneumonia In Hindi

बच्चों में निमोनिया(Pneumonia In Hindi) के लक्षण मिलते ही डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों में खांसी बिगड़ते देर नहीं लगती। चिकित्सीय परामर्श के साथ-साथ बच्चों को गर्म वातावरण में रखें। किंतु कभी भी अंगीठी जैसे उपाय से गर्मी न करें। क्योंकि अंगूठी का धुआँ बच्चों को सांस लेने में और भी अधिक दिक्कत कर सकता है। हल्के गुनगुने तेल में सेंधा नमक मिलाकर बच्चे की छाती और पीठ पर हल्के हाथ से मालिश फायदा करती है। बच्चे की नाभि में तेल सिंचन करें तथा तलवों की मालिश करें। इससे बच्चों को सांस में आराम मिलता है। रोग के अधिक बढ़ने पर छाती का एक्स-रे कराएं। चिकित्सक एंटीबायोटिक का भी प्रयोग करते हैं। अधिक गंभीर अवस्था में ऑक्सीजन भी देनी पड़ सकती है। इसलिए बच्चों के मामले में डॉक्टरी परामर्श अवश्य लें। बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर पर दूध पिलाने की कोशिश जरूर करें। इससे बच्चे में पानी की कमी नहीं होगी तथा उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहेगी।

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