घर में खुशहाली के लिए अपनाये यह वास्तु टिप्स – Vastu Shanti Mantra

वास्तु शास्त्र की पूजा परिवार में सुख, समृद्धि हेतु बहुत जरुरी है। वास्तु शास्त्र पूजन की कहानी: मत्स्यपुराण में लिखा है कि अंधकासुर के वध के समय भगवान शंकर के ललाट से पृथ्वी पर जो स्वेतबिंदु गिरे उनसे एक भयंकर आकृत्ति वाला पुरुष प्रकट हुआ। जिसने अंधकरणों का रक्तपान किया फिर भी अतृप्त हो और त्रिलोकीको भक्षण करने के लिए उद्धत हो गया। जिसे महादेवाधि देवो ने पृथ्वी पर सुलाकर वास्तु देवता के रूप प्रतिष्ठित किया और उसके शरीर में सभी देवताओ ने वास किया, इसी लिए वह वास्तु पुरूष या वास्तु देवता कहलाने लगा।

इस लेख में आपको Vastu Tips For Home,Vastu Shanti Mantra और वास्तु शांति मंत्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।

Vastu Shanti Mantra

ऊवास्तोष्पते प्रतिजानीहारमान्स्वावेशो अनमीयो भयानः।
यत् त्येमहे प्रतितन्नो जुषस्वशंनो भवद्विपदेशं चुतष्पदे ॥
नूतनघर में प्रवेश के समय Vastu Shanti Mantra के सवा लाख जप योग्य विद्वान ब्राह्मणद्वारा कराने से घर में सदैव सुख-शान्ति, ऐश्वर्य आदिकी प्राप्ति होती है।

 Vastu Tips For Home

  1. घर में टेलीफोन आनेय कोण में रखना चाहिए तथा टेलीफोन पर बात करते समय मुंह दक्षिण कीओर नहीं होना चाहिए।
  2. टीवी घर के कमरे में आनेय कोण में रखना शुभ है।टीवी देखते समय हमारा मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
  3. घर में रसोईघर आग्रेय कोण में बनाना शुभ रहता है। ईशान कोण में रसोई घर अशुभ होता है।
  4. रसोईघर में गैस चूल्हे का प्लेटफार्म पूर्व दिशा की दीवार की ओर बनाना चाहिए तथा रसोई बनाने वाले का मुंह पूर्व दिशा की ओर रहना शुभ माना गया है।
  5. रसोईघर में पानी रखने का स्थान ईशान कोण में शुभ है।
  6. घर में शयन कक्ष का मुख्य दरवाजा पूर्व या उत्तर दिशा में शुभ होता है। शयनकक्ष की दीवारों पर सफेद या हल्का हरा रंग अच्छा रहता है। गहरा रंग दीवारों पर नहीं लगाना चाहिए।
  7. शयनकक्ष में पलंग का सिरहाना पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। इससे नींद गहरी आती है। उत्तर में सिरहाना नही रखना चाहिए।
  8. शयनकक्ष में पलंग पर बीम नहीं होना चाहिए। शयनकक्ष में दक्षिण दिशा में पैर कर सोने से मानसिक तनाव रहता है, क्योंकि दक्षिण दिशा यम का स्थान है।
  9. घर के मुखिया का शयनकक्ष आनेय कोण में होने से पति-पत्नी में वैचारिक मतभेद होता है।
    बच्चो के अध्ययन कक्ष की दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए।
  10. घर में तहखाना दक्षिण दिशा में नहीं बनाना चाहिए।
  11. घर में शौचालय का निर्माण पश्चिम या वायव्य दिशा में करवाना चाहिए। शौच कूप इस प्रकार लगायें कि मनुष्य का मुंह पूर्व दिशा या उत्तर दिशा में रहे।
  12. दुकान, ऑफिस, फैक्ट्री आदि में मालिक को पूर्व अथवा उत्तर को मुख करके बैठना चाहिये। दुकान की वायव्य दिशा में रखा गया माल शीध्र बिकता है। फैक्ट्री में भी तैयार माल वायव्य दिशा में रखना चाहिये।

 

वास्तु शास्त्र – विकिपीडिया

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