Vitamin B2 Riboflavin in Hindi: बी कॉम्प्लेक्स सौन्दर्य विटामिन रिबोफ्लेविन के स्वास्थ्य लाभ

विटामिन बी2(Vitamin B2) या रिबोफ्लेविन बी कॉम्प्लेक्स समूह का द्वितीय सदस्य है। ‘रिबोफ्लेविन’ दो शब्दों के जोड़ से बना है: ‘रिबोस’। (ribose) अर्थात अनेक विटामिनों तथा इंज़ाइमों में पाई जाने वाली रिबोस शुगर और ‘फ्लेविन’ (flavin) जिसका अर्थ पीला होता है। विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का वह भाग जो गरम करने के बाद भी वैसा ही बना रहता है, उसमें रिबोस शुगर के समान मोलक्यूल होते हैं तथा जो रंग में पीला है, इसे रिबोफ्लेविन(Riboflavin) कहते हैं। इस लेख में बी कॉम्प्लेक्स सौन्दर्य विटामिन रिबोफ्लेविन के स्वास्थ्य लाभ,Riboflavin in Hindi, और कमी के लक्षण के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।

रिबोफ्लेविन – Riboflavin

रिबोफ्लेविन(Riboflavin) एक स्फटिक या पारदर्शी पदार्थ है जिसकी रंगत पीली-संतरी खूबसूरत-सी होती है। यह पानी में घुलनशील होता है। हालांकि अल्कलाइन या क्षारीय घोल में गरमी से यह तुरंत नष्ट हो जाता है परन्तु किसी एसिड घोल में उबालने पर भी नष्ट नहीं होता। यह विटामिन दृश्य तथा अल्ट्रावायलेट प्रकाश के लिये बहुत संवेदनशील होता है अर्थात भोजन को प्रकाश में रखने अथवा धूप में सुखाने से उनका रिबोफ्लेविन कारक नष्ट हो जाता है। साधारण खाना-पकाने में रिबोफ्लेविन पर प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन पानी की अधिक मात्रा में पकाने से विटामिन का कुछ भाग भोजन से निकल सकता है। सल्फा ड्रग तथा एल्कोहल विटामिन बी2 को नष्ट कर सकते हैं। रिबोफ्लेविन छोटी आंतों के माध्यम से रक्तप्रवाह में अवशोषित होता है। यह शरीर के ऊतकों में जाता है तथा कोशिका इंज़ाइमों में समा जाता है। इसके भंडारण का मुख्य स्थान यकृत है तथा इसमें शरीर के कुल रिबोफ्लेविन का लगभग एक-तिहाई भाग एकत्रित रहता है। यकृत, गुरदे तथा हृदय में इस विटामिन के समृद्ध भंडार होते हैं। लेकिन शरीर इसे बड़ी मात्रा में एकत्रित नहीं करता। रिबोफ्लेविन मुख्यतः मूत्र द्वारा निष्कासित हो जाता है। इसके निष्कासन के अन्य लघु मार्ग हैं पित्त (bile) तथा पसीना।

रिबोफ्लेविन के कार्य – Riboflavin in Hindi

शारीरिक-पोषण तथा सामान्य स्वास्थ्य के लिये रिबोफ्लेविन आवश्यक होता है। यह इंज़ाइमों के सामूहिक-अंश के रूप में कार्य करता है जो कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन के पाचन में सम्मिलित होते हैं। यह ऊतक की मरम्मत के लिये आवश्यक होता है। रिबोफ्लेविन पाचन तथा स्नायु तंत्र के कार्य करने में सहायता करता है। यह कब्ज़ को रोकता है, स्वस्थ त्वचा, नाखून तथा बालों की वृद्धि में मदद करता है और मुख, होंठों तथा जीभ के श्लेष्मा आवरण (mucous lining) को मज़बूत करता है। रिबोफ्लेविन आंखों के स्वास्थ्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है तथा आखों पर होने वाले दबाव को कम करता है। Vitamin B2 विशेषरूप से ग्लॉकोमा (glaucoma) का प्रतिरोध करता है। विटामिन बी2 की पर्याप्त आपूर्ति से शक्ति मिलती है तथा इससे सुन्दर रूप को बनाए रखने में मदद मिलती है तथा युवा होने की भावना भी बनी रहती है। स्रोत रिबोफ्लेविन से समृद्ध भोजन हरी सब्ज़ियां हैं जैसे कमलककड़ी, शलजम के पत्ते, चुकंदर, मूली के पत्ते, अरबी तथा गाजर के पत्ते; फल जैसे पपीता, किशमिश, शरीफा तथा खुर्मानी; पशुओं से प्राप्त होने वाले भोजन जैसे भेड़ का यकृत तथा अंडे, गाय का दूध वसारहित। इस विटामिन के अन्य प्रख्यात स्रोत हैं बादाम, अखरोट, चिल्गोज़ा, पिस्ता तथा सरसों के बीज। चावल तथा गेंहू को पीसने में रिबोफ्लेविन नष्ट हो जाता है क्योंकि इसके जीवाश्म तथा चौकर इस प्रक्रिया में निकल जाते हैं। अभाव के लक्षण रिबोफ्लेविन की कमी के कारण आंखे लाल, प्रकाश के लिये असामान्य संवेदनशीलता, आंखों में जलन तथा खुजली, मुख में शोथ, खट्‌टी तथा जलती हुई जीभ और होंठ व इनके कोनों पर फटन आदि लक्षण होते हैं। इसके कारण बाल बेजान या तैलीय हो जाते हैं, त्वचा तैलीय हो जाती है और चेहरे तथा हाथों पर समय से पहले झुरियां पड़ जाती हैं एवं नाखून टूटने लगते हैं। रिबोफ्लेविन की न्यूनता से एड्रीनल ग्रन्थियों के कार्य में कमी आ जाती है जिससे अनेक प्रकार की व्याधियां हो सकती हैं जैसे रक्ताल्पता, योनि में खुजली तथा मोतियाबिंद (cataract)।

रिबोफ्लेविन के स्वास्थ्य लाभ – Riboflavin in Hindi

रिबोफ्लेविन(Vitamin B2) की 25 से 50 मि.ग्रा. या 25,000 से 50,000 मा. ग्रा. की मात्रा से पोषण-सम्बन्धी कमियों, मोतियाबिंद तथा आंखों के अन्य रोगों का निदान किया जा सकता है और यह खुराक पाचन सम्बन्धी अनियमितताओं, मानसिक अवसाद तथा सामान्य कमज़ोरी में लाभदायक है।  रिबोफ्लेविन एक प्रकार के मोतियाबिंद के रोगियों के लिये आशा की किरण है जिसे पोषणीय मोतियाबिंद (nutritional cataract) कहा जाता है। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया मेडिकल स्कूल में एक अध्ययन के दौरान खोजा गया था। मोतियाबिंद को दूर रखने में रिबोफ्लेविन को विशेषरूप से लाभदायक पाया गया था। कोई भी व्यक्ति जिसकी आंखों की पेशियां कमज़ोर हैं या उनमें किसी भी प्रकार की तकलीफ है, उसे रिबोफ्लेविन की बड़ी मात्रा को चिकित्सक की सलाह अनुसार लेना चाहिए। विटामिन ए का सम्बन्ध आंख की दृष्टि से होता है लेकिन रिबोफ्लेविन का सम्बन्ध आंख की पेशियों तथा नाड़ियों की मज़बूती से होता है। त्वचा सम्बन्धी रोग : त्वचा सम्बन्धी शिकायतें जैसे तैलीयता, त्वचा के सफेद और काले कील, पपड़ी बनना, फटन तथा दाने आदि को रिबोफ्लेविन की नैदानिक मात्रा में लेने से ठीक किया जा सकता है। इस विटामिन की दीर्घकालीन कमी से त्वचा के भूरा होने की शिकायत हो सकती है। यदि 6 मास तक प्रतिदिन 15 मि.ग्रा. या 15,000 मा. ग्रा. की विटामिन बी2 की खुराक ली जाये तो यह भद्दे दाग गायब हो जाते हैं।

राइबोफ्लेविन से संबंधित सावधानियां – Vitamin B2

रिबोफ्लेविन में विषाक्तता बहुत कम मात्रा में होती है तथा मानव-शरीर में रिबोफ्लेविन से किसी विषाक्ता का मामला नहीं देखा गया है। शायद इसका कारण यह है कि इस विटामिन को कम मात्रा में ही अवशोषित किया जा सकता है। यदि रिबोफ्लेविन का अवशोषण कुछ अधिक होता है तो उसके संभावित लक्षणों में खुजली, सुस्ती तथा जलन होती है। Riboflavin in Hindi

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