Vitamin C: विटामिन सी एस्कॉर्बिक एसिड की कमी के लक्षण और उसके स्रोत

विटामिन सी(Vitamin C) सफेद स्फटिक रूप में दिखता है तथा पानी में तुरंत ही घुल जाता है। यह विटामिन उष्मा, आक्सीकरण, सुखाने तथा भंडारण से नष्ट हो जाता है। थोड़ी-सी भी क्षारिता इस विटामिन को नष्ट कर देती है। गर्म करने से एसिड (अम्लीय) फल तथा सब्ज़ियां कम एस्कॉर्बिक एसिड खोती हैं। पकाने के समय शुरुआती मिनटों में कुछ सब्जियों में यह विटामिन नष्ट हो जाता है।

Vitamin C-एस्कॉर्बिक एसिड

एस्कॉर्बिक एसिड का अवशोषण छोटी आंत के ऊपरी भाग के रक्तप्रवाह में होता है। विभिन्न ऊतकों में एस्कॉर्बिक एसिड की मात्रा भिन्न होती है: एड्रीनल तथा पीयूष ऊतकों (pituitary tissue), मस्तिष्क, पित्तकोश, गुरदों, यकृत तथा अग्न्याशय (spleen) में सापेक्षरूप से अधिक सघनता होती रक्तप्रवाह से अधिक यह रक्तकोशिकाओं में पाया जाता है। विटामिन सी को गुरदों द्वारा मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित किया जाता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है तो इसका उत्सर्जन कम या समाप्त हो जाता है। यदि प्रतिदिन 3 ग्राम से अधिक विटामिन सी को लिया जाये तो अनावशोषित एस्कॉर्बिक एसिड मुख्यरुप से मल द्वारा उत्सर्जित होता है ।

Vitamin C के शरीर में कार्य

Vitamin C का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कार्य कोलेजन का निर्माण करना है जो एक प्रोटीन पदार्थ है तथा कोशिकाओं को आपस में जोड़ता है। एस्कॉर्बिक एसिड आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है। यह अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा तथा सहनशक्ति के लिये आवश्यक होता है। यह स्वस्थ त्वचा, प्राकृतिक रंगत तथा स्वस्थ मसूढ़ों और दांतों को बनाये रखता है। यह सभी ग्रन्थियों तथा अंगों के कार्य में योगदान देता है। यह विटामिन हड्डियों, एड्रीनल और थायरायड ग्रन्थियों को बनाए रखने में आवश्यक होता है तथा सभी प्रकार के तनावों से बचाता है फिर चाहे यह तनाव मानसिक हो या शारीरिक। यह वातावरणीय, भोजनीय, जलीय विषाक्त रसायनों से भी सुरक्षा प्रदान करता है साथ ही यह दवाईयों के विषाक्त प्रभाव का भी प्रतिरोध करता है।

Vitamin C के स्रोत

Vitamin C के मुख्य स्रोत हैं नींबू परिवार के फल तथा सब्ज़ियां। फलों में इस विटामिन के सबसे अच्छे स्रोत हैं आंवला (gooseberry), अमरूद, नींबू, मौसमी, संतरा तथा पपीता। जड़ वाली सब्जियों तथा आलू में यह कम मात्रा में पाया जाता है। लेकिन प्रतिदिन आलू की अधिक खुराक लेने से यह एस्कॉर्बिक एसिड का मुख्य स्रोत बन जाता है। पशुओं से प्राप्त होने वाले भोजन पदार्थों में यह विटामिन कम ही मिलता
है; सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है मछली। सूखी अवस्था में अन्न तथा दालों में यह विटामिन नहीं पाया जाता लेकिन जब इन्हें लगभग 48 घंटे पानी में भिगोया जाता है और इनके अंकुर निकल आते हैं तो वह विटामिन के अच्छे स्रोत बन जाते हैं।

विटामिन सी के अभाव के लक्षण

Vitamin C की न्यूनता के कारण कोमल मसूढ़े, त्वचा से रक्त बहना, रक्तवाहिनियों की कमज़ोरी, कोलेजन का हास, रक्ताल्पता तथा फोड़ों और घावों का धीमी गति से ठीक होना आदि होते हैं। इसकी कमी के कारण समयपूर्व बुढ़ापा, अपर्याप्त थायरायड तथा सभी प्रकार के संक्रमणों के विरुद्ध कम प्रतिरोधन सम्मिलित हैं। इसकी कमी से दवाईयों तथा वातावरणीय विष का विषाक्त प्रभाव बढ़ जाता है। विटामिन सी की कुछ कमी से आलस्य, थकान, भूख की कमी, पेशीय दर्द तथा संक्रमण की अतिसंवेदनशीलता होते हैं। इसकी दीर्घकालिक कमी से स्कर्वी हो सकता है।

विटामिन सी के स्वास्थ्य लाभ

विटामिन सी की उचित मात्रा को नियमित लेने से सामान्य ठंड की रोकथाम की जा सकती है तथा यदि ठंड लग ही चुकी है तो इस विटामिन की बड़ी मात्रा द्वारा
इसके लक्षणों से कम समय में छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन कुछ अध्ययनों में यह कहा गया है कि इससे सर्दी की अधिकता तथा अवधि पर केवल कुछ ही प्रभाव होता है।

संक्रमण : विटामिन सी की प्रशंसा एक महत्त्वपूर्ण कारक के रूप में इसलिये की जाती है क्योंकि यह संक्रमित जीव की रक्षा करता है। किसी संक्रामक रोग से पीड़ित व्यक्ति के मूत्र, रक्त या सेरेब्रोस्पाइनल द्रव्य की परीक्षा पर यह ज्ञात होता है कि उनमें विटामिन सी की मात्रा असामान्यरूप से कम है। यदि ऐसे रोगियों को विटामिन सी की अतिरिक्त आपूर्ति की जाये तो यह शरीर में एकत्र होगा न कि मूत्र में निकल जायेगा। सभी तीव्र संक्रामक रोगों में विटामिन सी की बड़ी खुराक के प्रयोग की सलाह दी जाती है। इस इलाज को निरन्तर करना चाहिए तथा इसकी खुराक को धीरे-धीरे कम करना चाहिए जबतक पूरी तरह से स्वास्थ्य लाभ न हो जाये।

तनाव : तनाव के दौरान विटामिन सी की आवश्यकता इतनी अधिक बढ़ जाती है कि इसकी कमी कुछ ही घंटों में पता चल जाती है बेशक इस विटामिन को सामान्य अनुशंसित मात्रा में लिया भी जा रहा हो तब भी। जब विटामिन सी की कमी हो तो रक्तवाहिनियां कमज़ोर हो जाती हैं। इस विटामिन की अधिक कमी से लघु अल्सर तथा इसका अंतिम परिणाम

अन्य रोग : विटामिन सी का प्रयोग उपचार के रूप में अन्य कई रोगों तथा अवस्थाओं के इलाज के लिये किया गया है, जैसे हेमेटेमेसिस (रक्त की उल्टी आना), नाक से रक्तस्राव होना, रक्तस्रावी बवासीर, मेलेनिआ (आंतों में रक्त के कारण काले मल का होना), इरीथेमा नोडोसम (त्वचा में लाल गांठ), आंख की पुतली में अल्सर, एनोक्सिया (गंध में कमी), दांत तथा धीमी वृद्धि तथा विकास और रिकेट्स।

सावधानियां : यह प्रमाणित हो चुका है कि विटामिन सी के विषाक्त प्रभाव नहीं होते, हालांकि इसे अत्यधिक मात्रा में लेने से कुछ अस्थायी और अप्रिय नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं जैसे कभी-कभार होने वाला डायरिया, अत्यधिक मूत्रण, गुरदे की पथरी तथा त्वचा की लाली। यदि इनमें से कोई लक्षण उभरता है तो इसकी मात्रा को कम कर देना चाहिए।

एस्कॉर्बिक अम्ल Wikipedia

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